आज सकट चतुर्थी का पर्व है। इसे सकट चौथ के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक रूप से यह तिथि बेहद महत्वपूर्ण है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। सकट चतुर्थी का पर्व गणेश भगवान को समर्पित है। इसलिए आज के दिन सकट चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। इस चतुर्थी में चन्द्रमा के दर्शन करने से गणेश जी के दर्शन का पुण्य फल मिलता है।
सकट चतुर्थी का मुहूर्त
चतुर्थी तिथि प्रारंभ - 13 जनवरी, समय 17:34:00 बजे से
चतुर्थी तिथि समाप्त - 14 जनवरी, समय 14:51:03 बजे तक
इन शहरों में इस समय दिखेगा
दिल्ली - 20:33:59
नोएडा - 20:33:00
लखनऊ - 20:21:00
कानपुर - 20:23:59
बनारस - 20:14:00
प्रयागराज - 20:18:59
भोपाल - 20:40:00
पटना - 20:04:59
पूजा विधि
इस दिन उपवास का संकल्प लेकर व्रती प्रातः से चंद्रोदय काल तक नियमपूर्वक रहें।
सांयकाल लकड़ी के पाटे पर लाल कपडा बिछाकर मिट्टी के गणेश एवं चौथ माता की तस्वीर स्थापित करें।
रोली, मोली, अक्षत, फल, फूल आदि श्रद्धा पूर्वक अर्पित करें।
गणेश जी एवं चौथ माता को प्रसन्न करने के लिए तिल और गुड़ से बने हुए तिलकुटे का नैवेद्य अर्पण करें।
अब तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर उसमें लाल चन्दन, कुश, पुष्प, अक्षत आदि डालें।
इसके बाद चन्द्रमा को यह बोलते हुए अर्घ्य दें- 'गगन रुपी समुद्र के माणिक्य चन्द्रमा ! दक्ष कन्या रोहिणी के प्रियतम ! गणेश के प्रतिविम्ब ! आप मेरा दिया हुआ यह अर्घ्य स्वीकार कीजिए'।
चन्द्रमा को यह दिव्य तथा पापनाशक अर्घ्य देकर गणेश जी कथा का श्रवण या वाचन करें।
इसका महत्व
सकट चौथ पूरे साल में पड़ने वाली 4 बड़ी चतुर्थी तिथियों में से एक है। सकट चौथ पर सुहागन स्त्रियां सुबह-शाम गणेशजी की पूजा करती है और रात में चंद्रमा के दर्शन और पूजा करने के बाद पति का आशीर्वाद लेती हैं। इसके बाद व्रत खोला जाता है। इस तरह व्रत करने से संतान की उम्र लंबी होती है और दाम्पत्य जीवन में कभी संकट नहीं आता। शादीशुदा जीवन में प्रेम के साथ सुख भी बना रहता है। इस व्रत को करने से पति के भी सारे संकट दूर हो जाते हैं।