हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त को रखा जा रहा है। सनातन धर्म में एकादशी व्रत और पूजा का विशेष महत्व होता है। सावन के महीने में पड़ने वाली पुत्रदा एकादशी का व्रत प्रमुख रूप से संतान प्राप्ति की मनोकामना और बच्चों की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा विधि-विधान से करने से संतान सुख और संतान संबंधी बाधाएं समाप्त होती हैं। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने के लिए कई तरह के उपाय किए जाते हैं।
पुत्रदा एकादशी पर संतान सुख के लिए उपाय
- पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है और इस संबंध में मान्यता है इस दिन विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने संतान सुख की प्राप्ति होती है। पुत्रदा एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की प्रतिमा पर शंख, तुलसीदल और चंदन का लेप करते हुए उनकी पूजा करें।
- पुत्रदा एकादशी पर सुबह पीपल के वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें और दीपक जलाएं। फिर इसके बाद पीपल के पेड़ की परिक्रमा करते हुए "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे संतान संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।
- संतान सुख और शांति के लिए पुत्रदा एकादशी पर पीली मिठाई , हल्दी, चना दाल या केले का दान किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को करें। इससे संतान के सुख और सौभाग्य की वृद्धि होती है और संतान के कष्टों को दूर करने में सहायक होता है।
- पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु और संतान सुख की प्राप्ति के लिए मंत्रों का जाप जरूर करना चाहिए। इस दिन"ॐ देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते। देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः॥" मंत्र का जाप करें। इस मंत्र के जाप से संतान प्राप्ति की दिशा में अत्यंत प्रभावशाली उपाय है।
- पुत्रदा एकादशी पर शाम के समय वटवृक्ष के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाएं और विष्णु चालीसा का पाठ करें। यह उपाय संतान की लंबी आयु और उनकी रक्षा के लिए अत्यंत फलदायक होता है।
- पुत्रदा एकादशी पर संतान सुख के लिए भगवान विष्णु की पूजा और कथा सुनने का विशेष महत्व होता है। दिन व्रत रखते हुए एकादशी की कथा जरूर सुननी चाहिए।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।