Pongal Date 2021 दक्षिण भारत में धूम-धाम से मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार पोंगल 14 जनवरी, गुरुवार के दिन मनाया जाएगा। एक तरफ जहां उत्तर भारत में 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा तो दूसरी ओर दक्षिण भारत में पोंगल। दक्षिण भारत में पोंगल को नए वर्ष के रूप में मनाया जाता है। जहां उत्तर भारत में इस दिन को सूर्य के मकर राशि में जाने और उत्तरायण होने की खुशी में मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है, तो वहीं दक्षिण भारत में फसल काटने के बाद भगवान को धन्यवाद देने के लिए पोंगल का त्योहार मनाते हैं। पोंगल का उत्सव दक्षिण भारत में 4 दिन तक चलता है। इस दौरान घरों की साफ-सफाई की जाती है। पोंगल पर बुराईयों का त्याग किया जाता है। जिसे पोही कहा जाता है।
चार दिनों तक मनाया जाता है पोंगल
दक्षिण भारत का यह महत्वपूर्ण त्योहार चार दिनों तक मनाया जाता है। पोंगल पर्व के चार दिन वर्षा, प्रकाश, पशु और उपज की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। आइए जानते हैं चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व की खास बातें....
पहले दिन भगवान इंद्र की पूजा की जाती है। इस पूजा को भोगी पोंगल कहते हैं। वर्षा के लिए भगवान इंद्र का आभार प्रगट करते हुए जीवन सुख और समृद्धि की कामना की जाती है। पोंगल के पहले दिन लोग अपने पुराने हो चुके सामानों की होली जलाते हुए नाचते हैं। इसको भोगी मंटालू कहते हैं।
दूसरे दिन सूर्य देवता की पूजा होती है। सूर्य के उत्तरायण होने के बाद सूर्य देव का आभार प्रगट किया जाता है। इस दिन एक विशेष खीर बनाई जाती है जिसे पोंगल खीर कहा जाता है। दूसर दिन को सूर्य पोंगल के तौर पर मनाया जाता है।
तीसरे दिन पशुधन की पूजा होता है। इसे मट्टू पोंगल के तौर पर मनाया जाता है। इसमें लोग मट्टू यानी बैल की विशेष रूप से पूजा करते हैं। अपने पशुओं का आभार व्यक्त करने के लिए इस दिन गाय और बैलों को सजाया उनकी पूजा की जाती है। इस दिन बैलों की दौड़ जिसे जली कट्टू कहते उसका आयोजन भी होता है।
चौथा दिन पोंगल का आखिरी दिन होता है। इस दिन को कन्या पोंगल के रूप में मनाया जाता है। पोंगल के चौथे दिन घरों को फूलों और पत्तों से सजाया जाता है। आंगन और घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाई जाती है। कन्या पूजन कर लोग एक-दूसरों को पोंगल की बधाईयां देते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।