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Pitru Paksha 2024: श्राद्ध पक्ष में पूर्वजों को प्रसन्न करने के लिए करें पितृ स्त्रोत का पाठ

Mon, 09 Sep 2024 04:38 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Pitru Paksha 2024: 17 सितंबर 2024 से पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है, जिसका समापन 2 अक्तूबर 2024 को होगा।
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Pitru Paksha 2024 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Pitru Paksha 2024: 17 सितंबर 2024 से पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है, जिसका समापन 2 अक्तूबर 2024 को होगा। हिंदू धर्म में इस अवधि को पितरों की पूजा और आशीर्वाद पाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध के दौरान पितृ पृथ्वी लोक पर आते हैं। इसलिए उनकी आत्म शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और पूजा पाठ से जुड़े कार्य करने चाहिए। इससे वंशों पर उनकी कृपा बनी रहती है।

पितृ पक्ष के समय घरों में कई नियमों का पालन भी किया जाता है, जिससे वह प्रसन्न होते हैं। कहते हैं कि पितृ पक्ष में यदि पूरे विधि विधान से श्राद्ध कर्म और पितरों का तर्पण किया जाए, तो इससे पितृ ऋण चुकाने में मदद मिलती है।

इस दौरान कुछ खास उपाय भी किए जाते हैं, जिससे पितृ दोष की समस्या से राहत मिलती है। ऐसे में आप दिव्य पितृ स्त्रोत का पाठ कर सकते हैं। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। साथ ही व्यक्ति की सभी समस्याओं का हल भी होता है। आइए इसके बारे में जानते हैं। 

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Pitru Paksha 2024: जल्द शुरू होने वाले हैं पितृ पक्ष, इस विधि से करें पितरों का श्राद्ध
 

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1. अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ।
नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम् ।।

2. इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ।
सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् । ।

3. मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्दमसोस्तथा ।
तान् नमस्यामहं सर्वान् पितृनप्युदधावपि ।।

4. नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा ।
द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि: ।।

5. देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान् ।
अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येहं कृताञ्जलि: ।।

6. प्रजापते: कश्पाय सोमाय वरुणाय च ।
योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि: ।।

7. नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु ।
स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ।।

8. सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा ।
नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ।।

9. अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् ।
अग्रीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत: ।।

10. ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्रिमूर्तय: ।
जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण: ।।
तेभ्योखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतामनस: ।
नमो नमो नमस्तेस्तु प्रसीदन्तु स्वधाभुज ।।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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