फाल्गुन माह में फुलैरा दूज का विशेष महत्व होता है। फुलैरा दूज फाल्गुन महीने का सर्वश्रेष्ठ दिन होता है। इस दिन अबूझ मुहूर्त बनता है यानी बिना पत्रा देखें इस दिन पर कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य संपन्न किए जा सकते हैं। फुलैरा दूज से ही होली के उत्सव की शुरुआत हो जाती है। इस बार फुलैरा दूज 8 मार्च को है।
फुलैरा दूज का महत्व
फुलैरा दूज फाल्गुन महीने का सबसे अच्छा दिन होता है। फुलैरा दूज से ही होली के रंग में सराबोर होने का दिन शुरू हो जाता है। फुलैरा दूज पर अबूझ मुहूर्त होता है इसलिए इस दिन को विवाह के लिए सबसे दिन उत्तम माना जाता है।
फुलैरा दूज पर घरों को फूलों और रंगोली से पूरे घर को सजाया जाता है। इस दिन से घरों और मंदिरों में भगवान कृष्ण और राधाजी को फूलों से सजाया जाता है। साथ ही फुलैरा दूज पर कृष्णजी को पकवान का भोग लगाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन राधा कृष्ण की पूजा करने से सारी मनोकानाएं पूरी हो जाती है।
कहां मनाई जाती है फुलैरा दूज
फुलैरा दूज खासतौर पर उत्तर भारत में विशेष रूप से मथुरा और वृंदावन में बड़े जोश और उमंग के साथ मनाई जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा की पूजा की जाती है। इस दिन सभी मंदिरों को तरह-तरह के रंग बिरंगे फूलों से सजाया जाता है और फूलों की होली खेली जाती है।