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Parshuram Jayanti 2025: शुभ योग में परशुराम जयंती, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

Mon, 28 Apr 2025 06:30 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

पंचांग के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 29 अप्रैल 2025 को शाम 5 बजकर 32 मिनट से आरंभ होगी और इसका समापन 30 अप्रैल को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर होगा।
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परशुराम जयंती 2025 - फोटो : adobe stock
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विस्तार
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Parshuram Jayanti 2025: वैदिक पंचांग के अनुसार हर वर्ष भगवान परशुराम की जयंती का पर्व वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। हिंदू धर्म में परशुराम जयंती का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के छठे अवतार माने गए हैं। आठ चिरंजीवियों में भगवान परशुराम एक हैं जो आज भी इस धरती पर मौजूद हैं। इस वर्ष परशुराम जंयती 29 अप्रैल को है। इस बार भगवान परशुराम पर बहुत ही शुभ योग जैसे त्रिपुष्कर और सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग बन रहा है। आइए जानते हैं महत्व और पूजा मुहूर्त...

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परशुराम जयंती तिथि 2025
पंचांग के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 29 अप्रैल 2025 को शाम 5 बजकर 32 मिनट से आरंभ होगी और इसका समापन 30 अप्रैल को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान परशुराम जी का जन्म प्रदोषकाल में हुआ था, जिस कारण से इनका जन्मोत्सव 29 अप्रैल को अक्षय तृतीया से पहले मनाया जाएगा। 

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परशुराम जयंती शुभ योग और मुहूर्त 2025
इस बार भगवान परशुराम जयंती पर सर्वार्थ सिद्धि और त्रिपुष्कर योग का निर्माण हो रहा है। ऐसें इन योग में भगवान परशुराम की पूजा-अर्चना की जा सकती है। 
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परशुराम जयंती महत्व
अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर भगवान विष्णु के अवतार परशुराम का जन्म हुआ था।  परशुरामजी की जयंती वैशाख मास में शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है। इस पावन दिन को अक्षय तृतीया कहा जाता है। भगवान परशुराम भार्गव वंश में जन्मे भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं, उनका जन्म त्रेतायुग में हुआ था।  माना जाता है कि इस दिन किया गया दान-पुण्य कभी क्षय नहीं होता । अक्षय तृतीया के दिन जन्म लेने के कारण ही भगवान परशुराम की शक्ति भी अक्षय थी।इतना ही नहीं इनकी गिनती तो महर्षि वेदव्यास, अश्वत्थामा, राजा बलि, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, ऋषि मार्कंडेय सहित उन आठ अमर किरदारों में होती है जिन्हें कालांतर तक अमर माना जाता है।उनके पिता का नाम जमदग्नि और माता का नाम रेणुका था। पौराणिक ग्रंथों में वर्णित है कि भगवान परशुराम अत्यंत क्रोधी स्वभाव के थे। इनके क्रोध से देवी-देवता भी थर-थर कांपते थे। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एक बार परशुराम ने क्रोध में आकर भगवान गणेश का दांत तोड़ दिया था। वहीं पिता के कहने पर उन्होंने अपनी को भी मार दिया था।इस दिन भगवान् विष्णु के परशुराम अवतार की पूजा करने से शौर्य,कांति एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है,शत्रुओं का नाश होता है।  

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