पापों का होता है प्रायश्चित
पापाकुंशा एकादशी व्रत करने से मनुष्य के जीवन में जाने-अनजाने में हुए सभी पापों का प्रायश्चित हो जाता है। इस व्रत का प्रभाव इतना महान है कि यह आत्मा को शुद्ध कर देता है और मनुष्य को ईश्वर के सान्निध्य के योग्य बना देता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस व्रत का पालन करने वाले को विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।
दान का है विशेष महत्व
इस दिन दान करना भी अत्यंत पुण्यदायी होता है। पद्मपुराण के अनुसार जो व्यक्ति सुवर्ण, तिल, भूमि, गौ, अन्न, जल, जूते और छाते का दान करता है, उसे कभी यमलोक के दर्शन नहीं करने पड़ते। यही कारण है कि पापाकुंशा एकादशी को दान-पुण्य का श्रेष्ठ दिन माना जाता है।
Papankusha Ekadashi 2025: पापांकुशा एकादशी आज, जानें महत्व और प्रभु को प्रसन्न करने की पूजा विधि
भगवान पद्मनाभ की उपासना
इस एकादशी पर गरुड़ पर विराजमान भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा की जाती है। प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लें और भगवान को चंदन, अक्षत, मोली, पुष्प, फल तथा मेवा अर्पित करें। इसके साथ ही 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करना और धूप-दीप से भगवान की आरती करना अति शुभकारी माना जाता है।
जागरण और कथा श्रवण का फल
इस दिन रात्रि जागरण और एकादशी कथा श्रवण का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि जागरण करने वाला व्यक्ति स्वर्ग का अधिकारी बनता है।
पापाकुंशा एकादशी की कथा
प्राचीन समय में विंध्य पर्वत पर एक क्रूर बहेलियां रहता था। उसने अपनी सारी जिंदगी हिंसा, लूटपाट, मद्यपान और गलत संगति में व्यतीत कर दी। जब उसका अंतिम समय आया तब यमराज के दूत बहेलिये को लेने आए और यमदूत ने बहेलिये से कहा कि कल तुम्हारे जीवन का अंतिम दिन है हम तुम्हें कल लेने आएंगे। यह बात सुनकर बहेलिया बहुत भयभीत हो गया और महर्षि अंगिरा के आश्रम में पहुंचा और महर्षि अंगिरा के चरणों पर गिरकर प्रार्थना करने लगा। महर्षि अंगिरा ने बहेलिये से प्रसन्न होकर कहा कि तुम अगले दिन ही आने वाली आश्विन शुक्ल एकादशी का विधि पूर्वक व्रत करना।बहेलिये ने महर्षि अंगिरा के बताए हुए विधान से विधि पूर्वक पापांकुशा एकादशी का व्रत करा और इस व्रत पूजन के बल से भगवान की कृपा से वह विष्णु लोक को गया ।जब यमराज के यमदूत ने इस चमत्कार को देखा तो वह बहेलिया को बिना लिए ही यमलोक वापस लौट गए।