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कब है निर्जला एकादशी और क्या इस दिन जल ग्रहण करना चाहिए ? जानिए तिथि, पूजा विधि और महत्व

Fri, 29 May 2026 12:34 AM IST
Vinod Shukla ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Nirjala Ekadashi 2026: सभी एकादशी में निर्जला एकादशी के व्रत का विशेष महत्व होता है। इस एकादशी व्रत को करने से सभी 24 एकादशी के बराबर पुण्य का लाभ मिलता है। 
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Nirjala Ekadashi 2026 - फोटो : अमर उजाला AI
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विस्तार
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Nirjala Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है। वर्ष भर में कुल 24 एकादशी का व्रत रखा जाता है, लेकिन जब अधिकमास का वर्ष होता है उसमें दो एकादशी बढ़ जाती है जिसके चलते कुल 26 एकादशी आती है। इस तरह से हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष में एकादशी आती है। इस बार ज्येष्ठ माह में अधिक मास पड़ने के कारण कुल 4 एकादशी पड़ रही है। ज्येष्ठ माह में पड़ने वाली एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं। यह एकादशी सभी एकादशी में सबसे विशेष मानी जाती है क्योंकि इस दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत रखा जाता है। निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से व्रत का पूरा फल मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत रखने से सभी एकादशी के बराबर फल मिलता है। आइए जानते हैं निर्जला एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त और और इसके धार्मिक महत्व के बारे में। 

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कब है निर्जला एकादशी 
वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जून 2026 को शाम 06 बजकर 12 मिनट से शुरू हो जाएगी। इस तिथि का समापन 25 जून 2026 को रात 08 बजकर 09 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026 को रखा जाएगा।

निर्जला एकादशी व्रत और पूजा का समय 
निर्जला एकादशी व्रत में विधि-विधान के साथ व्रत रखते हुए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन ब्रह्रा मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त और रवि योग में पूजा करने का खास महत्व होता है। ब्रह्रा मुहूर्त की बात करें तो सुबह 04 बजकर 05 मिनट से लेकर 04 बजकर 45 मिनट तक रहेगा, वहीं अभिजीत मुहूर्त का समय सुबह 11 बजकर 56 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 52 मिनट रहेगा और रवियोग का समय सुबह 05 जबकर 25 मिनट से लेकर शाम 04 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। 
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क्या निर्जला एकादशी पर जल ग्रहण करना चाहिए?
निर्जला एकादशी का महत्व खास होता है। इस व्रत में साधक बिना जल ग्रहण किए व्रत रखता है। ऐसे में अगर आपने निर्जला एकादशी व्रत रखने का संकल्प कर रखा है तो बिना जल ग्रहण किए इस व्रत को रखें। यह निर्जला एकादशी का व्रत सभी एकादशी में खास होता है क्योंकि इस माह में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ती है जिससे कारण बिना पानी पीए व्रत रखा जाता है। 

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निर्जला एकादशी व्रत का महत्व 
शास्त्रों और पुराणों में निर्जला एकादशी के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया है। कथा के अनुसाार, महाभारत में जब महान और पराक्रमी भीम ने एकादशी का व्रत रखना चाहा तो वह बिना भोजन किए इस व्रत को नहीं रख पा रहे थे। तब वेदव्यास जी ने भीम को साल की सिर्फ एक एकादशी व्रत को रखने को कहा। वह एकादशी ज्येष्ठ माह में आने वाली निर्जला एकादशी थी। वेदव्यास जी ने कहा जो भी ज्येष्ठ माह की इस निर्जला एकादशी को रखता है उसको सभी 24 एकादशी के बराबर का फल प्राप्त होता है। इस निर्जला एकादशी व्रत को रखने से सभी तरह के पापों नष्ट हो जाते हैं। इस व्रत को विधि-विधान के साथ करने, जप, तप और दान करने से भगवान विष्णु जल्द प्रसन्न होते हैं। 

निर्जला एकादशी व्रत पारण 2026
26 मई 2026 को निर्जला एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा। ऐसे में व्रत पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 05 जबकर 25 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 13 मिनट तक कर सकते हैं। 
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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