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Navratri 2020: जल्द समाप्त होने वाला है अधिकमास, फिर आरंभ होंगे नवरात्रि, जानिए महत्वपूर्ण तिथियां

Mon, 12 Oct 2020 12:56 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

  • 17 अक्तूबर से नवरात्रि आरंभ
  • अधिकमास के कारण एक महीने की देरी से शारदीय नवरात्रि
  • घोड़े पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा 
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navratri 2020: नवरात्रि पूरे नौ दिनों का होगा और मुहूर्त ग्रंथों के अनुसार महाष्टमी का व्रत 23 अक्तूबर शुक्रवार को किया जाएगा।
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विस्तार
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इस बार साल 2020 में नवरात्रि समेत कई पर्व एक महीने की देरी से आरंभ हो रहे हैं। अधिकमास के कारण इस बार हिंदू कैलेंडर 12 महीने के बजाए 13 महीने का है। 16 अक्तूबर को अधिकमास का महीना खत्म होने वाला है। अधिकमास के समाप्त होने के फौरन बाद शारदीय नवरात्रि आरंभ हो जाएंगे।  नवरात्रि 17 अक्तूबर से 25 अक्तूबर तक देवी के नौ स्वरूपों की पूजा आराधना की जाएगी। 25 अक्तूबर का दशहरा का त्योहार है। इस बार अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन मनाई जाएगी। दरअसल हिंदू पंचांग के अनुसार 24 अक्तूबर की सुबह 6 बजकर 58 मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी फिर उसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी। 

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घोड़े पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा 
इस बार शारदीय नवरात्रि पर मां दुर्गा अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए घोड़े की सवारी पर आएंगी और भैंस पर विदा होंगी। शनिवार का दिन होने कारण माता का वाहन अश्व होगा। शास्त्रों के अनुसार माँ दुर्गा प्रत्येक नवरात्रि पर्व के प्रथम दिन अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर अपने भक्तों को वरदान देने आती हैं उनके वाहन के अनुसार ही मेदिनी ज्योतिष के फलित का विश्लेषण किया जाता है। रविवार और सोमवार को नवरात्रि का शुभारम्भ हो तो माँ दुर्गा का वाहन हाथी है जो अत्यंत जल की वृष्टि कराने वाला संकेत होता है। शनिवार और मंगलवार को नवरात्रि का शुभारंभ हो तो माँ का आगमन घोड़ा (तुरंग) पर होता जो राजा अथवा सरकार के परिवर्तन का संकेत देता है। गुरुवार और शुक्रवार को नवरात्रि का प्रथम दिन पड़े तो माँ का आगमन डोली में होता है जो जन-धन की हानि, तांडव, रक्तपात होना बताता है। यदि नवरात्रि का शुभारंभ बुधवार हो तो माँ दुर्गा 'नौका' पर विराजमान होकर आती हैं और अपने सभी भक्तों को अभीष्ट सिद्धि देती है।

शशि सूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे । गुरौ शुक्रे च डोलायां बुधे नौका प्रकीर्त्तिता'।
गजे च जलदा देवी छत्र भंगस्तुरंगमे । नौकायां सर्वसिद्धि स्यात डोलायां मरण ध्रुवम्।


घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
प्रसिद्धि ज्योतिषाचार्य पं. जयगोविंद शास्त्री के अनुसार इस शारदीय नवरात्रि आश्विन शुक्लपक्ष प्रतिपदा का आरम्भ शनिवार को चित्रा नक्षत्र तथा चंद्रमा के तुला राशि के गोचर काल के समय में हो रहा है।  सुबह 07 बजकर 23 मिनट के बाद कलश स्थापना का मुहूर्त भी आरम्भ हो जाएगा। नवरात्रि पूरे नौ दिनों का होगा और मुहूर्त ग्रंथों के अनुसार महाष्टमी का व्रत 23 अक्तूबर शुक्रवार को किया जाएगा। भारत अथवा विश्व के जिस कोने में 24 अक्तूबर को अष्टमी तिथि 48 मिनट तक व्याप्त रहेगी वहाँ पर अष्टमी 24 अक्तूबर को ही मानई जाएगी। स्थानीय सूर्योदय के अनुसार ही इस पर विचार किया जा सकता है। 17 अक्तूबर को पुण्यकाल दोपहर 01 बजकर 27 मिनट तक रहेगा इसके पहले कलश स्थापन व्रत संकल्प आदि कर लेना अति शुभ रहेगा। 
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नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना और मां शैलपुत्री की आराधना
नवरात्रि का शुभारंभ आश्विन शुक्लपक्ष प्रतिपदा पर कलश स्थापना कर मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की आराधना के साथ होती है। मां शैलपुत्री  पर्वतराज हिमालय की पुत्री है जिस कारण से उनका नाम शैलपुत्री कहा गया है। मां शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल पुष्प सुशोभित हैं। नवदुर्गाओं में प्रथम शैलपुत्री दुर्गा का महत्व और शक्तियां अनंत हैं।
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17 अक्तूबर- प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना कलश स्थापना
18 अक्तूबर- मां ब्रह्मचारिणी पूजा
19 अक्तूबर- मां चंद्रघंटा पूजा
20 अक्तूबर- मां कुष्मांडा पूजा
21 अक्तूबर- मां स्कंदमाता पूजा
22 अक्तूबर- षष्ठी मां कात्यायनी पूजा
23 अक्तूबर- मां कालरात्रि पूजा
24 अक्तूबर- मां महागौरी दुर्गा पूजा, दुर्गा अष्टमी और महानवमी।
25 अक्तूबर- मां सिद्धिदात्री पूजा, दशहरा, विजयादशमी, नवरात्रि पारण।
26 अक्तूबर- दुर्गा विसर्जन।

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