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Navratri 2022 : अष्टमी-नवमी तिथि को कन्या पूजन, जानिए कन्या पूजन का महत्व और पूजा विधि

Thu, 07 Apr 2022 12:22 PM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद
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चैत्र नवरात्रि 2022: कन्या पूजन के बिना नवरात्रि व्रत को पूर्ण नहीं माना जाता। मनुष्य प्रकृति रूपी कन्याओं का पूजन करके साक्षात भगवती की कृपा पा सकते हैं। - फोटो : अमर उजाला
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Navratri 2022 Durga Ashtami Navami Importance Puja Vidhi : सृष्टि का पालन और संचालन करने वाली आद्याशक्ति की आराधना का पर्व नवरात्रि चल रहे हैं। नवरात्रि सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी जगत जननी को समर्पित हैं। हमारी भारतीय संस्कृति में कन्याओं को दुर्गा का साक्षात स्वरूप माना गया है,इसीलिए कन्या पूजन के बिना नवरात्रि व्रत को पूर्ण नहीं माना जाता। मनुष्य प्रकृति रूपी कन्याओं का पूजन करके साक्षात भगवती की कृपा पा सकते हैं। इन कन्याओं में मां दुर्गा का वास रहता है। कन्या पूजन नवरात्रि पर्व के किसी भी दिन या कभी भी कर सकते हैं। लेकिन अष्टमी और नवमी को कन्या पूजन के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

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कन्या पूजन का महत्व
कन्याओं का सम्मान और पूजन से देवी मां बहुत प्रसन्न होती हैं और मनोकामनाएं पूरी करती हैं। देवी पुराण में कहा गया है कि मां को जितनी प्रसन्नता कन्या भोज से मिलती है,उनको उतनी प्रसन्नता हवन और दान से भी नहीं मिलती। धार्मिक मान्यता के अनुसार,दो से दस वर्ष की 9 कन्याओं का पूजन करना शुभ माना गया है। एक कन्या की पूजा करने से ऐश्वर्य,दो कन्याओं से भोग व मोक्ष दोनों,तीन कन्याओं के पूजन से धर्म,अर्थ व काम तथा चार कन्याओं के पूजन से राजपद मिलता है। पांच कन्याओं की पूजा करने से विद्या,छह कन्याओं की पूजा से छह प्रकार की सिद्धियां,सात कन्याओं से सौभाग्य,आठ कन्याओं के पूजन से सुख-संपदा प्राप्त होती है। नौ कन्याओं की पूजा करने करने से संसार में आपकी यश-कीर्ति बढ़ती है।

कन्या पूजन की विधि
प्रात:काल स्नान करके देवी मां की पूजा करें और प्रसाद में खीर,पूरी,हलवा,कच्चा नारियल से मां का भोग लगाएं। कन्याओं को आमंत्रित करने के बाद शुद्ध जल में हल्दी मिलाकर उनके चरण धोने चाहिए और सम्मान पूर्वक उन्हें साफ आसन पर बैठाएं। राजस्थान,उत्तरप्रदेश एवं गुजरात राज्यों में तो कहीं कहीं नौ कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को भी भोज कराने की परंपरा है। बालक को भैरव बाबा का स्वरूप या लंगूर कहा जाता है। दुर्गा स्वरूप इन कन्याओं को खीर,पूरी,चने,हलवा आदि का सात्विक भोजन कराएं। कन्याओं को सुमधुर भोजन कराने के बाद उन्हें टीका लगाएं और कलाई पर रक्षासूत्र बांधें। प्रदक्षिणा कर उनके चरण स्पर्श करते हुए यथाशक्ति वस्त्र, फल और दक्षिणा देकर विदा करें।
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वास्तुदोषों का निवारण
मान्यता है कि नवरात्र के दिनों में कन्याओं को देवी का रूप मानकर आदर-सत्कार करने एवं भोजन कराने से घर का वास्तुदोष दूर होता है। ज्योतिष में भी कन्या पूजन को बहुत फलदायी माना गया है। यदि किसी जातक की कुंडली में बुध ग्रह बुरा फल दे रहा है,तो आपको कन्या पूजन करना चाहिए। 

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