विश्वभर में कोरोना वायरस के संकट के बीच चैत्र नवरात्रि आरंभ हो चुके हैं। 9 दिनों तक चलने वाले इस पवित्र नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ स्वरुपों की पूजा-आराधना की जाती है। देवी पुराण के अनुसार हर नवरात्रि पर मां 9 दिनों के लिए पृथ्वी पर पधारती हैं। देवी दुर्गा का वाहन शेर होता है, लेकिन नवरात्रि पर अलग- अलग वाहनों पर सवार होकर आती हैं। शास्त्रों के अनुसार माता का अलग-अलग वाहनों की सवारी से देश-दुनिया में इसका प्रभाव पड़ता है।
देवी के आगमन का वाहन
- नवरात्रि के अवसर पर माता दुर्गा सोमवार या रविवार के दिन हाथी पर सवार होकर आती हैं।
- अगर नवरात्रि का शुभारंभ शनिवार या मंगलवार के दिन होता है तो देवी का वाहन घोड़ा होता है।
- वहीं अगर गुरुवार या शुक्रवार के दिन नवरात्रि शुरू होने पर देवी दुर्गा डोली में बैठकर आती हैं।
- बुधवार के दिन नवरात्रि शुरू होने पर मां दुर्गा का वाहन नाव होती है।
देवी के विदाई का वाहन और महत्व
नवरात्रि पर देवी दुर्गा जिस तरह अलग-अलग वाहनों की सवारी कर पृथ्वी पर आती हैं उसी तरह नौ दिनों के बाद अलग-अलग वाहनों से उनकी विदाई भी तय होती हैं।
- देवी दुर्गा की विदाई अगर रविवार या सोमवार के दिन होती है तो वह भैंसे की सवारी कर वापस जाती हैं। यह देश के लिए अशुभ संकेत होता है।
- अगर नवरात्रि का अंतिम दिन शनिवार या मंगलवार को पड़ता है तो देवी दुर्गा मुर्गे की सवारी पर जाती है। इससे दुखों और परेशानियों में बढ़ोतरी होती है।
- देवी दुर्गा की विदाई का दिन अगर बुधवार या शुक्रवार को होता है तो माता हाथी की सवारी पर जाती हैं। यह शुभ संकेत होता है।
- वहीं अगर नवरात्रि का अंतिम दिन गुरुवार के होने पर मां दुर्गा मनुष्य की सवारी कर जाती हैं। इससे समाज और परिवार में सुख-शांति में बढ़ोतरी होती है।