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Nag Panchami 2022: देश के प्रसिद्ध नाग मंदिर, जहां पर दर्शन और पूजा से कालसर्प दोषों से मिलती है मुक्ति

Mon, 01 Aug 2022 03:00 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शास्त्रों में नौ प्रकार के नाग का जिक्र किया गया है। ज्योतिष के अनुसार अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष या राहु दोष है तो इसकी शांति के लिए नाग पंचमी की तिथि बहुत खास मानी गई है।
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हिंदू पंचांग के अनुसार नाग पंचमी का त्योहार हर वर्ष सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। नाग पंचमी पर नागदेवता की विशेष पूजा होती है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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02 अगस्त का नाग पंचमी है। हिंदू पंचांग के अनुसार नाग पंचमी का त्योहार हर वर्ष सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। नाग पंचमी पर नागदेवता की विशेष पूजा होती है। नाग देवता भगवान शिव के गले में सुशोभित रहते हैं। हिंदू धर्म में नाग को पूजनीय माना जाता है और नाग पंचमी का पर्व नागदेवता को समर्पित होता है। सृष्टि के पालनकर्ता भगवान शिव शेषनाग पर निद्रा में रहते हैं वहीं शिवपुराण में वासुकी नाग भगवान शिव गले में धारण करते हैं। शास्त्रों में नौ प्रकार के नाग का जिक्र किया गया है। ज्योतिष के अनुसार अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष या राहु दोष है तो इसकी शांति के लिए नाग पंचमी की तिथि बहुत खास मानी गई है। नाग पंचमी पर शिवालयों और नागदेवता के मंदिरों में भारी भीड़ एकत्रित होती है जहां पर नाग देवता की पूजा की जाती है। भारत में ऐसी कई जगह है जहां पर नागदेवता के प्रसिद्ध मंदिर है। आइए जानते हैं देश में कहां-कहां पर है प्रसिद्ध नाग देवता के मंदिर।
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नागचंद्रेश्वर मंदिर
नागचंद्रेश्वर मंदिर उज्जैन में स्थित है। यह नागदेवता का मंदिर पूरे साल सिर्फ एक बार नाग पंचमी के दिन पर ही खुलता है। इस मंदिर में भगवान शिव माता पार्वती संग नाग के फैलाए हुए फन के नीचे आसन पर विराजमान हैं।  उज्जैन के अलावा दुनिया में कहीं भी ऐसी प्रतिमा नहीं है। यह प्रतिमा नेपाल से यहां लाई गई थी। ऐसी मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन जो भी यहां पूजा-अर्चना करता है उसे कालसर्प के दोष से मुक्ति मिल जाती है। 

नाग वासुकि मंदिर
उत्तर प्रदेश का इलाहाबाद शहर जो अब प्रयागराज के नाम से जाना जाता है। यहां पर प्रसिद्ध नाग वासुकि का मंदिर स्थित है। नाग वासुकि भगवान शिव के गले में सुभोभित रहते हैं। इस मंदिर को शेषराज, सर्पनाथ, अनंत और सर्वाध्यक्ष कहा गया है। नाग पंचमी के दिन एक बड़ा मेला लगता है।
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तक्षकेश्वर नाथ मंदिर
यह मंदिर भी प्रयागराज में यमुना किनारे स्थित है। यह बहुत ही प्राचीन नाग मंदिर है। इस मंदिर के बारे में ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान शिव और नाग देवता का जो भी दर्शन करता उसे और उसके कुल को कभी भी सर्प भय और दोष नहीं रहता है। 

मन्नारशाला
मन्नारशाला मंदिर केरल राज्य में स्थित है। यह 30 हजार नागों वाला मंदिर है। जहां पर नागों की मूर्तियां है। यह मंदिर 16 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस मंदिर में नागराज तथा उनकी जीवन संगिनी नागयक्षी देवी की प्रतिमा स्थित है।

सेम-मुखेम नागराजा मंदिर
सेम-मुखेम नागराजा मंदिर उत्तराखंड के टिहरी में स्थित है । मान्यता है कि द्वारिका नगरी डूबने के बाद भगवान श्रीकृष्ण यहां नागराज के रूप प्रकट हुए थे। मन्दिर के गर्भगृह में नागराजा की स्वयं भू-शिला है। 
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