शास्त्रों में अमावस्या का विशेष महत्व होता है। खास तौर पर माघ महीने की अमावस्या को स्नान, ध्यान, तप और दान का करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस बार मौनी अमावस्या 4 फरवरी को सोमवार के दिन मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार इस दिन मौन रखना, गंगा स्नान करना और दान देने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। कई वर्षो के बाद ऐसा शुभ संयोग बन रहा है जब सोमवती अमावस्या के दिन यानी सोमवार के दिन मौनी अमावस्या की तिथि पड़ रही है। सोमवार और अमावस्या और मौनी अमावस्या पड़ने से इसका फल कई गुना बढ़ सकता है।
शास्त्रों के अनुसार मौनी अमावस्या पर सभी देवी देवता प्रयाग तीर्थ में इकट्ठे होते हैं। माघ की अमावस्या के दिन यहां पितृलोक के सभी पितृदेव भी आते हैं। अतः यह दिन पृथ्वी पर देवों एवं पितरों के संगम के रूप में मनाया जाता हैं। मौनी अमावस्या के दिन पूरे दिन मौन रखने की परम्परा होती है। माघ मास का यह दिन बड़ा ही खास है। धरती पर यहां देवता और पितर यहां आकर मिलती हैं।
ऐसी मान्यता है मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज के संगम में सभी देवताओं के स्नान करने से यहां का जल अमृत में बदल जाता है। इसलिए संगम में इस दिन गंगा स्नान का करने का विशेष महत्व होता है।
4 फरवरी को मौनी अमावस्या का पूर्ण काल प्रात: सूर्योदय से लेकर सायंकाल सूर्यास्त तक है। इस दिन अन्न, वस्त्र और स्वर्ण का दान अक्षय फल देना वाला होगा।