महाकाल के रूप में परब्रह्म परमेश्वर तीन ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं इनके अलग-अलग रूपों की पूजा भी अलग-अलग लोकों में होती है।आकाशे तारकं लिंगम् पाताले हाटकेश्वरम्।मृत्युलोके महाकालं लिंगत्रय नमोस्तुते || पहला तारक ज्योतिर्लिंग आकाश में, दूसरा हाटकेश्वर ज्योतिर्लिंग पाताल में और तीसरा श्रीमहाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग पृथ्वी पर उज्जैन, मध्य प्रदेश में स्वयंभू के रूप में पूजित होकर अपने भक्तों के
दैहिक, दैविक और भौतिक तीनों तापों का हरण कर रहे हैं।
सभी बारह ज्योतिर्लिंग में से श्रीमहाकाल ही दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजते हैं इसलिए यहाँ तांत्रिक जगत के साधकों का भी जमावड़ा रहता है। इनके दर्शन मात्र से प्राणी यमदण्ड का भय से मुक्त हो जाता है, उसे नवग्रहों के दोष से भी छुटकारा मिल जाता है। जन्मकुंडली में चल रही शनि की शाढ़ेसाती, ढैया मारकेश दशा, अशुभ गोचर-ग्रहों के दुष्प्रभाव से भी छुटकारा मिलता है। श्री महाशिवरात्रि के आरम्भ होने से पूर्व नौ दिन पहले से ही प्रतिदिन श्री महाकाल को दुल्हे की तरह सजाया जाता है। उसी शिवनवरात्रि का महोत्सव आज से आरम्भ हो रहा है जिसे देखने के लिए पूरे संसार से भक्तों का जनसैलाब महाकाल की नगरी उज्जैन में उमड़ रहा है।
महाकाल का नौ दिनों के श्रृंगार
आज फाल्गुन कृष्ण पक्ष पंचमी को शिवनवरात्रि महोत्सव के पावनपर्व से श्रीमहाशिवरात्रि तक महाकाल के अलग-अलग रूपों का श्रृंगार किया जायेगा महोत्सव के प्रथम दिन सबसे पहले कोटितीर्थ कुण्ड स्थित कोटेश्वर महादेव पर शिवपंचमी का पूजन-अभिषेक आदि होगा। वर्षों से चली आ रही यहाँ की परम्परा के अनुसार 11 वैदिक ब्राम्ह्णों एवं दो सहायक पुजारियों को एक-एक सोला तथा वरूणी उपहार स्वरूप प्रदान
किया जाएगा। श्रीकोटेश्वर महादेव के पूजन आरती के पश्चात श्री महाकालेश्वर जी का पूजन-अभिषेक एवं 11वैदिक ब्राम्ह्णों द्वारा नमक-चमक (एकादस आवृति) द्वारा रूद्राभिषेक किया जायेगा तत्पएश्चात भोग आरती आरती आदि कार्य किये जायेंगे।
पंचमी तिथि
आज फाल्गुन कृष्ण पंचमी को श्री महाकाल का चन्दन का श्रृंगार, कटरा, मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुण्ड माल, छत्र आदि से किया जाएगा।
षष्टी तिथि
षष्टी तिथि को श्री महाकाल का शेषनाग श्रृंगार, कटरा, मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुण्डमाल, छत्र आदि से किया जाएगा।
सप्तमी तिथि
सप्तमी तिथि को घटाटोप श्रृंगार, कटरा, मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुण्डमाल, छत्र आदि से किया जाएगा।
अष्टमी तिथि
अष्टमी तिथि को छबीना रूप का श्रृंगार, कटरा, मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुण्डमाल, छत्र आदि से किया जाएगा।
नवमी तिथि
नवमी तिथि को श्रीहोल्कर श्रृंगार, कटरा, मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुण्डमाल, छत्र आदि से होगा।
दशमी तिथि
दशमी तिथि को मार्च को श्री मनमहेश श्रृंगार, कटरा, मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुण्डमाल, छत्र आदि से होगा।
एकादशी
एकादशी को श्री उमामहेश श्रृंगार, कटरा, मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुण्डमाल, छत्र आदि से होगा।
द्वादशी तिथि
द्वादशी तिथि को शिवतांडव श्रृंगार, कटरा, मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुण्डमाल, छत्र से श्री महाकाल का श्रृंगार किया जायेगा।
चतुर्दशी तिथि
महाशिवरात्रि पर पूजन आदि और निरंतर जलधारा प्रवाहित होगी।चतुर्दशी तिथि को सप्तमधान श्रृंगार (सेहरा दर्शन), कटरा, मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुण्डमाल, छत्र आदि से श्रृंगार करके श्री परमेश्वर महाकाल का स्तवन किया जाएगा |