पारद शिवलिंग की पूजा को शास्त्रों में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। इस समूचे ब्रह्माण्ड में सर्वोत्तम दिव्य वस्तु के रूप में पूजित रससिद्ध पारद शिवलिंग समस्त दैहिक,दैविक एवं भौतिक महादुखों से मुक्ति दिलाने वाला है। पारद शम्भुबीज है यानि पारद की उत्पत्ति महादेव के शरीर से उत्पन्न पदार्थ शुक्र से मानी गई है। इसलिए शास्त्रों में पारद को साक्षात शिव का रूप माना गया है और पारद लिंग का सबसे ज़्यादा महत्त्व बताकर उसे दिव्य बताया गया है।
शिवमहापुराण में शिवजी का कथन है कि करोड़ों शिवलिंगों के पूजन से जो फल प्राप्त होता है उससे भी करोड़ गुना अधिक फल पारद शिवलिंग की पूजा और उसके दर्शन मात्र से ही प्राप्त हो जाता है। जो मनुष्य पारद शिवलिंग की भक्ति पूर्वक पूजा-अभिषेक तथा दर्शन करता है,उसे तीनों लोकों में स्थित समस्त शिवलिंगों के पूजन का फल मिलता है एवं सौ अश्वमेघ यज्ञ करने के बराबर का फल प्राप्त होता है। यह सभी तरह के लौकिक तथा परलौकिक सुख देने वाला है। इस शिवलिंग का जहां पूजन होता है वहां साक्षात शंकर का वास होता है।
लिंग महापुराण के अनुसार रत्न निर्मित लिंग श्री (लक्ष्मी) प्रदान करने वाला,पाषाण निर्मित लिंग समस्त सिद्धियों को देने वाला,धातु निर्मित लिंग धन-संपत्ति देने वाला तथा काष्ठ निर्मित शिवलिंग भोग-सिद्धि प्रदान करने वाला है। इसी प्रकार शुद्ध मिटटी से बना हुआ (पार्थिव) शिवलिंग सभी सिद्धियों की प्राप्ति कराने वाला माना गया है। शिवलिंग का अभिषेक करने से व्यक्ति के ग्रह-गोचर अनुकूल होने लगते हैं,घर से नकारात्मक ऊर्जा हमेशा के लिए दूर चली जाती है।