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Maha Shivratri 2026: आज महाशिवरात्रि पर इस विधि से करें भोलेनाथ की आराधना, हर संकट होंगे दूर

Sun, 15 Feb 2026 06:08 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Mahashivratri Puja Vidhi: महाशिवरात्रि 2026 का पर्व 15 फरवरी, रविवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। फाल्गुन मास की इस पावन रात्रि में भक्त व्रत रखकर शिवलिंग का जलाभिषेक और रात्रि जागरण करेंगे। पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त रात 12:09 से 01:01 बजे तक रहेगा, जिसमें की गई आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है।
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Mahashivratri 2026 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Mahashivratri Puja Vidhi: फाल्गुन मास में आने वाली महाशिवरात्रि शिव भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र और विशेष पर्व मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखकर भगवान शिव की आराधना करते हैं, शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ रात्रि जागरण करते हैं। माना जाता है कि महाशिवरात्रि की रात साधना और भक्ति का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इस समय की गई प्रार्थना और जप का कई गुना फल प्राप्त होता है।

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Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर किस समय होगी पूजा और कब करें जलाभिषेक ? जानें शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन पूजा का सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त रात 12:09 से 01:01 बजे तक रहेगा, जिसे विशेष रूप से फलदायी माना गया है। मान्यता है कि जो भक्त इस पावन रात्रि में सच्चे मन से भगवान शिव की उपासना करता है, उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति का वास होता है।
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Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का संयोग, जानें महत्व और अभिषेक के नियम
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महाशिवरात्रि पूजा विधि

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। कोशिश करें कि काले रंग के कपड़े न पहनें।
  • पूजाघर में दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें।
  • शिव-पार्वती की पूजा के लिए बेलपत्र, धतूरा, भांग, फूल, फल, चंदन, रोली, अबीर आदि तैयार करें।
  • मंदिर या घर में शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, रोली और अक्षत अर्पित करें।
  • दिन भर व्रत का पालन करें और समय मिलने पर भगवान शिव का ध्यान करते रहें।
  • दिन में संभव हो तो रुद्राभिषेक कराएं; यदि यह संभव न हो, तो शाम को स्वयं शिवलिंग का अभिषेक करें।
  • शाम में पुनः शिव-पार्वती की विधि विधान पूजा करें और उन्हें धतूरा, भांग, बेलपत्र आदि चढ़ाएं।
  • महाशिवरात्रि व्रत की कथा सुनें और भगवान शिव की कपूर से आरती करें।
  • आरती के बाद भोग अर्पित कर पूजा संपन्न करें।
  • यदि संभव हो तो रात्रि भर जागरण करें और शिव भक्ति में लीन रहें।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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