जो भी भक्त शीतला माँ की प्रतिदिन साधना-आराधना करते हैं, माँ उनपर अनुग्रह करती हुई, उनके घर-परिवार की सभी विपत्तिओं से रक्षा करती हैं। इनका ध्यान करते हुए शास्त्र कहते हैं कि —
'वन्देऽहंशीतलांदेवीं रासभस्थांदिगम्बराम्।
मार्जनीकलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्।।
अर्थात् मैं गर्दभ पर विराजमान, दिगम्बरा, हाथ में झाड़ू तथा कलश धारण करने वाली, सूप से अलंकृत मस्तक वाली भगवती शीतला की वंदना करता हूं। इस वंदना मंत्र से यह पूर्णत: स्पष्ट हो जाता है कि ये स्वच्छता की अधिष्ठात्री देवी हैं। हाथ में झाड़ू होने का अर्थ है कि हम लोगों को भी सफाई के प्रति जागरूक होना चाहिए। कलश में सभी तैतीस करोड़ देवी-देवताओं का वास रहता है, अत: इसके स्थापन-पूजन से घर परिवार में समृद्धि आती है। स्कन्द पुराण में इनकी अर्चना का स्तोत्र 'शीतलाष्टक' के रूप में प्राप्त होता है, इस स्तोत्र की रचना भगवान शंकर ने जनकल्याण के लिए की थी। शीतलाष्टक शीतला देवी की महिमा गान करता है, साथ ही उनकी उपासना के लिए भक्तों को प्रेरित भी करता है। मां शीतला की आराधना मध्य भारत एवं उत्तरपूर्व के राज्यों में बड़ी धूम-धाम से की जाती है।
क्या है धन, प्यार, नौकरी, मकान, शादी अथवा व्यापार से जुड़ी समस्याओं का समाधान, जानिये हमारे प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से मात्र 99 रुपये में। (विज्ञापन)