फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Vaishakh Purnima : मृत्यु के देवता भी देते हैं आशीर्वाद, जानें वैशाख पूर्णिमा से क्या है उनका संबंध?

Fri, 17 May 2019 08:47 AM IST
Madhukar Mishra अनीता जैन, वास्तुविद्
विज्ञापन
Vaishakh Purnima 2019
विज्ञापन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सनातन धर्म में वैशाख माह को पवित्र माह  माना गया है। यही कारण है कि इस पावन मास में हज़ारों श्रद्धालु पवित्र तीर्थ स्थलों में स्नान, दान कर पुण्य अर्जित करते हैं। पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व माना गया है। वैशाख शुक्ल पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा या पीपल पूर्णिमा कहा जाता है। इसी दिन भगवान बुद्ध की जयंती और निर्वाण दिवस भी बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। 

विज्ञापन


शनि जयंती के अवसर पर शनि दोष निवारण पूजा (03 जून 2019, सोमवार)

Vaishakh Purnima 2019
प्रत्येक माह की पूर्णिमा जगत के पालनकर्ता श्री हरि विष्णु भगवान को समर्पित होती है और भागवत पुराण के अनुसार महात्मा बुद्ध भगवान विष्णु के नौवें अवतार थे। स्कन्द पुराण के अनुसार वैशाख पूर्णिमा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि वैशाख मास को ब्रह्मा जी ने सब मासों में उत्तम सिद्ध किया है। अतः यह मास भगवान विष्णु को अति प्रिय है। 

vishnu - फोटो : vishnu
'पुष्करणी' तिथियों में मिलता है विशेष फल

वैशाख के शुक्ल पक्ष त्रयोदशी से लेकर पूर्णिमा तक की तिथियां 'पुष्करणी ' कही गयीं हैं। इनमें स्नान ,दान-पुण्य करने से पूरे माह स्नान का फल मिल जाता है। पूर्व काल में वैशाख मास की एकादशी तिथि को अमृत प्रकट हुआ, द्वादशी को भगवान विष्णु ने उसकी रक्षा की, त्रयोदशी को श्री हरि ने देवताओं को सुधापान कराया तथा चतुर्दशी को देवविरोधी दैत्यों का संहार किया और वैशाख की पूर्णिमा के दिन ही समस्त देवताओं को उनका साम्राज्य प्राप्त हो गया। अतः देवताओं ने प्रसन्न होकर इन तीन तिथियों को वर दिया -'वैशाख मास की ये तीन शुभ तिथियां मनुष्य के समस्त पापों का नाश करने वाली तथा सब प्रकार के सुख प्रदान करने वाली हों'।
विज्ञापन

Vaishakh Purnima 2019
मृत्यु के देवता का आशीर्वाद 

वैशाख माह की पूर्णिमा के दिन मृत्यु के देवता धर्मराज के निमित्त भी व्रत रखने का विधान है। इस दिन जल से भरा हुआ कलश, छाता , जूते, पंखा, सत्तू, पकवान आदि दान करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया दान गोदान के समान फल देने वाला होता है और ऐसा करने से धर्मराज प्रसन्न होते हैं। साथ ही मनुष्य को अकाल मृत्यु का भय भी नहीं रहता। नारद पुराण के अनुसार इस दिन व्रती जितने द्रव्य ब्राह्मण को दान करता है, उसको उतने ही शुभ फल प्राप्त होते हैं।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें