आज संकष्टी चतुर्थी तिथि है। इस पावन तिथि के देवता भगवान श्री गणेश जी माने जाते हैंं। आज के दिन बुद्धि, समृद्धि, सौभाग्य का आशीर्वाद प्रदान करने वाले गणपति की पूजा का अत्यधिक महत्व है। भगवान श्री गणेश की पूजा करने से सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। संकष्टी चतुर्थी के दिन गणपति की साधना-उपासना और व्रत करने पर साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उसे शुभ फल प्राप्त होते हैं।
श्री गणपति पूजन के लिए सुंदर सी पीतल की थाली में पुष्प, दीप, धूप, चंदन, कपूर, मौली, रोली, कुमकुम, अक्षत, दूर्वा, पान और मोदक, यह सामग्री एकत्रित कर लें।
किसी भी देवता की पूजा में दीपक का ज्यादा महत्व रहता है। इसलिए गणेश जी के पूजन में सबसे पहले दीपक प्रजवल्लित करें। इसके पश्चात् गणपति महाराज को पुष्प समर्पित करते हुए चन्दन का तिलक करें और लड्डू का भोग लगाएं। आप चाहें तो तो लड्डू के स्थान पर अपने द्वारा बनाया गया कुछ और भी भोग लगा सकते हैं। भोग लगाने के पश्चात जल समर्पित करें। आज के दिन सपरिवार गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करना न भूलें।
यह मंत्र गणपति महाराज को समर्पित है। इस मंत्र के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में निराशा नहीं रहती है। कोई भी अप्रिय घटना नहीं घटती है। इस मंत्र के जाप से घर में खुशहाली का वातावरण बना रहता है। व्यक्ति प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति करता है। व्यक्ति के शरीर की सुंदरता बढ़ती है और मनोवांछित फल प्राप्त होता है।
गणपति को प्रसन्न करने के लिए आज के दिन पांच दूर्वा की 11 गांठ किसी लाल धागा में बांध कर गणपति जी को चढ़ाएं और रात को गणपति जी को चढ़ाया हुआ अक्षत और कोई लाल फूल लेकर अपने सिरहाने रख कर सोएं। इस उपाय से गणपति जी की कृपा होगी और उनके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होगा। आपकी सभी मनोकामना भी पूर्ण होगी।