सनातन परंपरा में अमावस्या तिथि पर साधना-आराधनाा बड़ा महत्व बताया गया है। इस बार यह 03 जून 2019 को पड़ रही है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजन करने से श्री हरि की कृपा बरसती है। इस तिथि पर मां लक्ष्मी की साधना-आराधना भी सुख-समृद्धि दिलाने वाली होती है। चंद्रमा की 16वीं कला को अमावस्या कहा जाता है। इस तिथि पर चंद्रमा की यह कला जल में प्रविष्ट हो जाती है। इस तिथि पर चंद्रमा और सूर्य का अंतर शून्य होता है। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है।
लक्ष्मीप्रिया तिथि अमावस्या
अमावस्या तिथि मां लक्ष्मी की प्रिय तिथि है। इसी तिथि पर मां लक्ष्मी की साधना-आराधना सुख-समृद्धि दिलाने वाली होती है। इस तिथि पर साधना एवं रात्रि जागरण से मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है।
पितरों का पाएं आशीर्वाद
अमावस्या तिथि के स्वामी पितर हैं। मान्यता है कि अमावस्या तिथि पर पितृगण सूर्यास्त तक घर के द्वार पर वायु के रूप में रहते हैं। किसी भी जातक के लिए पितरों का आशीर्वाद बहुत जरूरी होता है। ऐसे में पितरों को संतुष्ट और प्रसन्न करने के लिए इस तिथि पर विशेष रूप से श्राद्ध एवं दान किया जाता है।
शनि जयंती के अवसर पर शनि दोष निवारण पूजा (03 जून 2019, सोमवार)
वर्ष 2019 — अमावस्या तिथि
03 जून — सोमवार — ज्येष्ठ अमावस्या
02 जुलाई — मंगलवार — आषाढ़ अमावस्या
01 अगस्त — गुरुवार — श्रावण अमावस्या
30 अगस्त — शुक्रवार — भाद्रपद अमावस्या
28 सितंबर — शनिवार — अश्विन अमावस्या
28 अक्टूबर — सोमवार — कार्तिक अमावस्या
26 नवंबर — मंगलवार — मार्गशीर्ष अमावस्या
26 दिसंबर — गुरुवार — पौष अमावस्या