अंग्रेजी कैलेंडर के लिहाज से साल की अंतिम एकादशी इस बार 13 दिसंबर है। इस एकादशी का व्रत हर साल पौष मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। अपने नाम के अनुसार यह व्यक्ति को उनके उद्देश्य एवं कर्मों में सफलता दिलाने वाला है। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार मनुष्य का अंतिम उद्देश्य मोक्ष प्राप्ति है। इस एकादशी के व्रत से मोक्ष का मार्ग सरल होता है। पुराणों में बताया गया है कि जो व्यक्ति नियमपूर्वक सफला एकादशी का व्रत करता है और रात्रि जागरण करके विष्णु भगवान का ध्यान कीर्तन करता है उसे कलियुग में कई वर्षों तक तपस्या करने का पुण्य प्राप्त होता है।
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पद्म पुराण में सफला एकादशी व्रत के महात्म्य को बताते हुए भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा है कि सफला एकादशी व्रत के देवता श्री नारायण हैं। जो व्यक्ति सफला एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करता है। रात्रि में जागरण करते हुए ईश्वर का ध्यान और श्री हरि के अवतार एवं उनकी लीला कथाओं का पाठ करता है उनका व्रत सफल और मनोकामना पूर्ण करने वाला होता है।