करवा चौथ में सरगी का महत्व
करवा चौथ के व्रत में सरगी का बहुत विशेष महत्व है। इस व्रत की शुरुआत सरगी के सेवन से ही होती है। इसके बाद विवाहित व्रती महिलाओं को पूरे दिन निर्जला व्रत रखना चाहिए। महिलाएं रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर और छलनी से अपने पति को देखकर अपना व्रत खोलती हैं।
सरगी का शुभ मुहूर्त और विधि
- करवा चौथ की शुरुआत सरगी से होती है। करवा चौथ के दिन सुबह 4-5 बजे के आसपास ब्रह्म मुहूर्त में सरगी करना बहुत शुभ होता है।
- सरगी के लिए सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
- स्नान के बाद भगवान की पूजा करनी चाहिए।
- सरगी के दौरान मिर्च, मसाले और तेल वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करनना चाहिए।
- सरगी में सूखे मेवे, मिठाई, दूध और फलों का सेवन करना जरूरी होता है।
- इसके सेवन से आपको दिन भर के लिए आवश्यक ऊर्जा मिलेगी और आपको थकान भी कम महसूस होगी।
- सरगी करने के बाद, भगवान के सामने हाथ जोड़कर संकल्प लें कि, चंद्रोदय तक बिना खाए-पिए उपवास करेंगे।
सरगी की थाल में क्या दें?
अगर आपके घर में कोई नवविवाहिता है तो उसे सरगी की थाली में कुमकुम, बिंदी, मेहंदी, साड़ी, सिंदूर, बिछिया, सूखे मेवे, मिठाई, ताजे फल और शगुन के रूप में कुछ पैसे देना शुभ होता है।
करवा चौथ पूजा का समय
पंचांग के अनुसार करवा चौथ पर पूजा के लिए मुहूर्त 20 अक्तूबर 2024 की शाम 5 बजकर 46 मिनट से शुरू होगा, जो शाम 7 बजकर 02 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में आप करवा माता की पूजा कर सकते हैं।
चांद निकलने का समय
इस साल करवा चौथ पर चांद निकलने का समय शाम 7 बजकर 53 मिनट का है। ऐसे में आप 7 बजकर 53 मिनट के बाद से चंद्रमा की पूजा कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।