करवा चौथ का व्रत 17 अक्तूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। यह व्रत सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं रखती हैं। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती है और पूजा-पाठ, भजन और कथा सुनती हैं। करवा चौथ का व्रत रात को चंद्रमा के दर्शन करने के बाद तोड़ा जाता है इसलिए इस व्रत में चांद का विशेष महत्व होता है। अगर आप विदेशों में रहते हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं, विदेशों में चंद्रोदय का समय और पूजा विधि
| शहर | समय |
| अमेरिका | 9 बजकर 7 मिनट पर |
| लंदन | 8 बजकर 3 मिनट पर |
| कनाडा | 10 बजकर 02 मिनट पर |
| अर्जेंटीना | 09 बजकर 16 मिनट पर |
| न्यूयार्क | 08 बजकर 41 मिनट पर |
| नेपाल | 08 बजकर 13 मिनट पर |
| पेरिस | 09 बजकर 20 मिनट पर |
| जर्मनी | 07 बजकर 55 मिनट पर |
| जापान | 07 बजकर 05 मिनट पर |
| सिंगापुर | 09 बजकर 55 मिनट पर |
| सिंगापुर | 09 बजकर 55 मिनट पर |
पूजन विधि
नारदपुराण के अनुसार महिलाएं वस्त्राभूषणों से विभूषित हो सांयकाल में भगवान शिव-पार्वती, स्वामी कर्तिकेय,गणेश एवं चंद्रमा का विधिपूर्वक पूजन करते हुए नैवेद्य अर्पित करें। अर्पण के समय यह कहना चाहिए कि ''भगवान कपर्दी गणेश मुझ पर प्रसन्न हों। रात्रि के समय चंद्रमा का दर्शन करके यह मंत्र पढते हुए अर्घ्य दें, मंत्र है- ''सौम्यरूप महाभाग मंत्रराज द्विजोत्तम, मम पूर्वकृतं पापं औषधीश क्षमस्व मे।'' अर्थात हे! मन को शीतलता पहुंचाने वाले, सौम्य स्वभाव वाले ब्राह्मणों में श्रेष्ठ, सभी मंत्रों एवं औषधियों के स्वामी चंद्रमा मेरे द्वारा पूर्व के जन्मों में किए गए पापों को क्षमा करें। मेरे परिवार में सुख शांति का वास रहे। मां पार्वती उन सभी महिलाओं को सदा सुहागन होने का वरदान देती हैं, जो पूर्णतः समर्पण और श्रद्धा विश्वास के साथ यह व्रत करती हैं। पति को भी चाहिए कि पत्नी को लक्ष्मी स्वरूपा मानकर उनका आदर-सम्मान करें क्योंकि एक दूसरे के लिए प्यार और समर्पण भाव के बिना यह व्रत अधूरा है।