10 जून यानि रविवार को ज्येष्ठ मास के मलमास महीने की एकादशी है। जिसे कमला एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह एकादशी सभी एकादशियों में महत्वपूर्ण मानी जाती है। क्योंकि यह अधिकमास यानी मलमास के महीने मे आती है और मलमास का महीना भगवान कृष्ण को समर्पित होता है। इस महीने में श्री कृष्ण की नियमित पूजा करने से अन्य महीनों की अपेक्षा अधिक पुण्य लाभ मिलता है। इस एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान कृष्ण की पूजा करने से कई गुणा पुण्य लाभ मिलता है।
ऐसी मान्यता है अगर एकादशी रविवार को पड़ जाए तो इस एकादशी व्रत फल कई गुना बढ़ जाता है क्योंकि एकदशी के व्रत के साथ ही इस दिन सूर्य का भी व्रत हो जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा एक साथ करने से सारी परेशानियों का अंत हो जाता है।
इन चीजों को करने से परहेज करें
-शास्त्रों के अनुसार कमला पुरूषोत्तम एकादशी के दिन कांसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए।
-इस दिन मसूर की दाल, चना, शहद, शाक एवं लहसुन, प्याज के सेवन से परहेज रखना चाहिए।
-इस दिन किसी और का दिया हुआ भोजन भी न करें।
- इस एकादशी पर मीठा भोजन और हो सके तो केवल फल खाकर ही रहना चाहिए।
क्या है इस एकादशी की कथा
पुरूषोत्तम एकादशी के विषय में जो कथा मिलती है उसके अनुसार इस व्रत से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है। एक अन्य कथा के अनुसार एक ब्राह्मण के पुत्र ने इस व्रत के नियमों का पालन करते हुए कमला पुरूषोत्तम एकादशी का व्रत रखा। व्रत के प्रभाव से माता लक्ष्मी उस पर प्रसन्न हुई और वह धनवान बन गया। व्रत के पुण्य से मृत्यु के पश्चात ब्राह्मण के इस पुत्र को भगवान श्री कृष्ण के गोलोक में स्थान प्राप्त हुआ। इस व्रत में दान का विशेष महत्व है। इस दिन जरूरतमंदों को तिल, वस्त्र, धन एवं अपनी श्रद्धा के अनुसार फल एवं मिठाई दान करना चाहिए।