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इंदिरा एकादशी 2018: इस एकादशी व्रत को करने पर मिलता है पितरों को मोक्ष, जानिए कथा

Wed, 03 Oct 2018 12:08 PM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी कहते हैं। इस बार यह एकादशी 5 अक्टूबर, शुक्रवार को पड़ रही है। श्राद्ध पक्ष में पड़ने के कारण इस एकादशी को श्राद्ध एकादशी भी कहते हैं। पितृपक्ष में इस एकादशी का बहुत अधिक महत्व होता है। इस एकादशी के बारे में ऐसी मान्यता है कि अगर कोई पितर भूलवश अपने पाप के कर्मों के कारण यमराज के दंड का भागी रहता है तो उसके परिजन के द्वारा इस एकादशी का व्रत करने पर उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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व्रत कथा
भगवान श्री कृष्ण ने इंदिरा एकादशी व्रत कथा का महत्व धर्मराज युद्धिष्ठर को बताया। सतयुग के समय की बात है। इंद्रसेन नाम का एक राजा था जिसका महिष्मति राज्य पर शासन था। राजा के राज्य में सभी प्रजा सुखी थी और राजा इंद्रसेन भगवान विष्णु के परम भक्त थे। एक बार राजा के दरबार में देवर्षि नारद पहुंचे तब राजा ने उनका स्वागत सत्कार किया और आने का कारण पूछा। तब देवर्षि नारद ने बताया कि मैं यम से मिलने यमलोक गया, वहां मैंने तुम्हारे पिता को देखा। वहां वह  अपने पूर्व जन्म में एकादशी का व्रत भंग होने के कारण यमराज के निकट उसका दंड भोग रहे हैं और तमाम तरह की यातनाएं झेलने उन्हें भोगनी पड़ रही है। इससे लिए उन्होंने इंदिरा एकादशी का व्रत करने को कहा है ताकि बैकुंड की प्राप्ति हो सके।तब राजा ने नारद जी से इंदिरा एकादशी व्रत के बारे में जानकारी देने को कहा। देवर्षि ने आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी व्रत की विधि के पालन के बारे में बताया, जिससे उनके पिता की आत्मा को शांति मिली और बैकुंठ की प्राप्ति हुई।

इंदिरा एकादशी व्रत- पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। इसके बाद  अपने पितरों का श्राद्ध करें और दिन में केवल एक बार ही भोजन करें। इसके बाद ब्राह्मण को फलाहार का भोजन करवायें और उन्हें दक्षिणा दें। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा-आराधना करे। एकादशी के व्रत का पारण एकादशी के अगले दिन सुबह करें।
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पूजा मूहूर्त
एकादशी प्रारम्भ: 4 अक्टूबर की रात को 9 बजकर 49 मिनट
एकादशी समाप्त: 5 अक्टूबर की  शाम को 7 बजकर 18 मिनट
 पारण का समय: 6 अक्टूबर सुबह 6:20 से 8:39 मिनट

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