पंचांग में अमावस्या की तिथि का विशेष महत्व है। चंद्रमा की 16वीं कला को अमावस्या कहा जाता है। इस तिथि पर चंद्रमा की यह कला जल में प्रविष्ट हो जाती है। इस तिथि पर चंद्रमा का औषधियों में वास रहता है। अमावस्या को माह की तीसवीं तिथि है, जिसे कृष्णपक्ष के समाप्ति के लिए जाना जाता है। इस तिथि पर चंद्रमा और सूर्य का अंतर शून्य होता है।
जिसके स्वामी पितर हैं
सनातन परंपरा में अमावस्या तिथि पर साधना-आराधनाा बड़ा महत्व बताया गया है। इस तिथि पर कोई न कोई पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है। इसके स्वामी पितर हैं। मान्यता है कि अमावस्या तिथि पर पितृगण सूर्यास्त तक घर के द्वार पर वायु के रूप में रहते हैं। किसी भी जातक के लिए पितरों का आशीर्वाद बहुत जरूरी होता है। ऐसे में पितरों को संतुष्ट और प्रसन्न करने के लिए इस तिथि पर विशेष रूप से श्राद्ध एवं दान किया जाता है।
लक्ष्मीप्रिया तिथि अमावस्या
अमावस्या तिथि मां लक्ष्मी की प्रिय तिथि है। कार्तिक मास की अमावस्या यानी दीपों का महापर्व दीपावली इसी तिथि विशेष पर मनाया जाता है। इसी तिथि पर मां लक्ष्मी की साधना-आराधना सुख-समृद्धि दिलाने वाली होती है। इस तिथि पर साधना एवं रात्रि जागरण से मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है।
वर्ष 2019 — अमावस्या तिथि
05 जनवरी — शनिवार — पौष अमावस्या
04 फरवरी — सोमवार — माघ अमावस्या
06 मार्च — बुधवार — फाल्गुन अमावस्या
05 अप्रैल — शुक्रवार — चैत्र अमावस्या
04 मई — शनिवार — वैशाख अमावस्या
03 जून — सोमवार — ज्येष्ठ अमावस्या
02 जुलाई — मंगलवार — आषाढ़ अमावस्या
01 अगस्त — गुरुवार — श्रावण अमावस्या
30 अगस्त — शुक्रवार — भाद्रपद अमावस्या
28 सितंबर — शनिवार — अश्विन अमावस्या
28 अक्टूबर — सोमवार — कार्तिक अमावस्या
26 नवंबर — मंगलवार — मार्गशीर्ष अमावस्या
26 दिसंबर — गुरुवार — पौष अमावस्या