Rudrabhishek in Sawan: रुद्राभिषेक का सीधा संबंध भगवान शिव से है। रुद्र, भगवान शिव के नाम का एक पर्याय है। रुद्राभिषेक शब्द का अर्थ है कि रुद्र का अभिषेक यानी भगवान शिव का अभिषेक करना। हिंदू धर्म में रुद्राभिषेक का बहुत महत्व होता है। वैसे तो इसका महत्व आम समय में ही बहुत होता है मगर सावन के महीने में रुद्राभिषेक करने का महत्व और भी बढ़ जाता है। मान्यताओं के अनुसार जिसकी कुंडली में कोई दोष या पाप होता है, ज्योतिष उन्हें श्रावण मास में रुद्राभिषेक करने का सलाह देते हैं। बहुत से लोग रुद्रभिषेक अपने श्रद्धा से करवाते हैं, क्योंकि इस क्रिया के माध्यम से व्यक्ति अपने निजी जीवन से जुड़े दुखों से भी निजात पा सकते हैं। रुद्राभिषेक में 108 पवित्र द्रव्यों से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। रुद्राभिषेक करने के कुछ नियम होते हैं, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।
ॐ नम: शम्भवाय च मयोभवाय च नम: शंकराय च मयस्कराय च नम: शिवाय च शिवतराय च ॥
ईशानः सर्वविद्यानामीश्व रः सर्वभूतानां ब्रह्माधिपतिर्ब्रह्मणोऽधिपति ब्रह्मा शिवोमे अस्तु सदाशिवोय् ॥
तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
अघोरेभ्योथघोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यः सर्वेभ्यः सर्व सर्वेभ्यो नमस्ते अस्तु रुद्ररुपेभ्यः॥
वामदेवाय नमो ज्येष्ठारय नमः श्रेष्ठारय नमो
रुद्राय नमः कालाय नम: कलविकरणाय नमो बलविकरणाय नमः
बलाय नमो बलप्रमथनाथाय नमः सर्वभूतदमनाय नमो मनोन्मनाय नमः ॥
सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः ।
भवे भवे नाति भवे भवस्व मां भवोद्भवाय नमः ॥
नम: सायं नम: प्रातर्नमो रात्र्या नमो दिवा ।
भवाय च शर्वाय चाभाभ्यामकरं नम: ॥
यस्य नि:श्र्वसितं वेदा यो वेदेभ्यो खिलं जगत् ।
निर्ममे तमहं वन्दे विद्यातीर्थ महेश्वरम् ॥
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिबर्धनम् उर्वारूकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
सर्वो वै रुद्रास्तस्मै रुद्राय नमो अस्तु । पुरुषो वै रुद्र: सन्महो नमो नम: ॥
विश्वा भूतं भुवनं चित्रं बहुधा जातं जायामानं च यत् । सर्वो ह्येष रुद्रस्तस्मै रुद्रायनमो अस्तु ॥