फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Holashtak 2021: इस दिन से लगेगा होलाष्टक, जानिए इस दौरान क्यों नहीं किए जाते हैं शुभ कार्य

Thu, 18 Mar 2021 07:49 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 4
होलाष्टक 2021 - फोटो : अमर उजाला
होलाष्टक 21 मार्च से प्रारंभ हो रहा है। होलाष्टक लगते ही शादी, विवाह, गृह प्रवेश, एवं अन्य प्रकार के मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी। होलाष्टक होली से आठ दिन पूर्व लग जाते हैं, जो होली से एक दिन पहले समाप्त होते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से फाल्गुन पूर्णिमा तक की अवधि को होलाष्टक कहा जाता है। इस साल होलाष्टक 21 मार्च से 28 मार्च तक रहेगा और 29 मार्च को होली मनायी जाएगी।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 4
होलाष्टक - फोटो : self
होलाष्टक में इसलिए नहीं होते मांगलिक कार्य
पौराणिक मान्यता के अनुसार, होलाष्ठक के आठ दिनों में क्रमश: अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध एवं चतुर्दशी को मंगल तथा पूर्णिमा को राहु उग्र रूप लिए माने जाते हैं तभी इन दिनों में गर्भाधान, विवाह, पुंसवन, नामकरण, चूड़ाकरन, विद्यारम्भ, गृह प्रवेश व निर्माण सकाम अनुष्ठान आदि अशुभ माने गये हैं। 
विज्ञापन

3 of 4
होलाष्टक से संबंधित पौराणिक कथा - फोटो : अमर उजाला
होलाष्टक से संबंधित पौराणिक कथा
शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन की परंपरा भक्त और भगवान के संबंध का प्रतीक है। जहां भक्त प्रहलाद हैं तो उनके ईश्वर भगवान विष्णु जी हैं। प्रहलाद जन्म से ही ब्रह्मज्ञानी थे और हर पल भगवत भक्ति में लीन रहते थे। भक्ति मार्ग के इस चरम सोपान को प्राप्त कर लेने के बाद प्राणी परमात्मा को प्राप्त कर लेता है। प्रहलाद भी इसी चरम पर पहुंच गये थे जिसका उनके पिता हिरण्यकश्यपु अति विरोध करते थे किंतु, जब प्रहलाद को नारायण भक्ति से विमुख करने के उनके सभी उपाय निष्फल होने लगे तो, उन्होंने प्रहलाद को फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि को बंदी बना लिया और मृत्यु हेतु तरह-तरह की यातनायें देने लगा, किन्तु प्रहलाद विचलित नहीं हुए। इस दिन से प्रतिदिन प्रहलाद को मृत्यु देने के अनेकों उपाय किये जाने लगे किन्तु ईश्वर की भक्ति में लीन होने के कारण प्रहलाद हमेशा जीवित बच जाते।
 
इसी प्रकार सात दिन बीत गये आठवें दिन अपने भाई हिरण्यकश्यपु की परेशानी देख उनकी बहन होलिका (जिसे ब्रह्मा द्वारा अग्नि से न जलने का वरदान था) ने प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में भस्म करने का प्रस्ताव रखा जिसे हिरण्यकश्यपु ने स्वीकार कर लिया। परिणाम स्वरुप होलिका जैसे ही अपने भतीजे प्रहलाद को गोद में लेकर जलती आग में बैठी तो, वह स्वयं जलने लगी और प्रहलाद पुनः जीवित बच गए क्योंकि उनके लिए अग्निदेव शीतल हो गए थे। तभी से भक्ति पर आघात हो रहे इन आठ दिनों को होलाष्टक के रूप में मनाया जाता है।
विज्ञापन

4 of 4
होलाष्टक के दौरान इन आठ दिनों में ईश्वर की भक्ति करें। - फोटो : सोशल मीडिया
होलाष्टक के दौरान करें उपाय
होलाष्टक के दौरान इन आठ दिनों में ईश्वर की भक्ति करें। अपने आराध्य देव की पूजा अर्चना करें। व्रत उपवास करें और धर्म कर्म के कार्य करें। होलाष्टक सामर्थ्य के अनुसार जरुरतमंदों को दान करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें