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गुड़ी पड़वा तो कहीं महा विशुभ संक्रांति के नाम से मनाया जाता है हिंदू नववर्ष

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हिंदू नववर्ष चैत्र नवरात्रि
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हिंदू नववर्ष विभिन्न नामों से लगभग पूरे देश में मनाया जाता है। उत्तर भारत में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही चैत्र नवरात्रि का आयोजन शुरू हो जाता है। कलश-स्थापना का मुहूर्त 6 अप्रैल को प्रातः 06:09 से 10: 19 बजे तक है। हिंदू नववर्ष को देश के कई हिस्सों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है।
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गुड़ी पड़वा
महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में गुड़ी पड़वा मनाया जाता है और नववर्ष की शुरुआत होती है। इसी तरह कर्नाटक और आंध्रप्रदेश क्षेत्र में युगादि का आयोजन होता है। 

मेष संक्रांति
भारत के कुछ क्षेत्रों में सौर कैलेण्डर के हिसाब से मेष संक्रांति से नव वर्ष मनाते हैं। यानि जिस दिन गोचरवश सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं। ये सामान्यतः 13, 14 या 15 अप्रैल को होता है।
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बैसाखी
बैसाखी ऐसा ही पर्व है जो पंजाब और हरियाणा के किसान फसल काटने के बाद मनाते हैं। बैसाखी के दिन ही सिखों के दसवें गुरू गुरु गोबिन्द सिंह ने सन् 1699 में पवित्र खालासा पंथ की स्थापना की थी।

पोहेला बोइशाख
इसी तरह बंगाल में पोहेला बोइशाख के रूप में नया साल मनाते हैं। बोहाग बिहू, असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों में मनाया जाने वाला एक प्रसिद्ध त्यौहार है। इसे रोंगाली बिहू या हतबिहू भी कहते हैं।

विशु
विशु केरल का प्राचीन त्यौहार है। यह केरलावासियों के लिए नववर्ष का दिन है। यह मलयालम महीने मेष की पहली तिथि को मनाया जाता है।

पुथंडु
पुथंडु, जिसे पुथुरूषम या तमिल नव वर्ष भी कहा जाता है, तमिल कैलेंडर पर वर्ष का पहला दिन है। तमिल तारीख को तमिल महीने चिधिराई के पहले दिन के रूप में, लन्नीसरोल हिंदू कैलेंडर के सौर चक्र के साथ स्थापित किया गया है। इसलिए यह हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर के 14 अप्रैल या उसके आस पास ही मनाया जाता है। 

महा विशुभ संक्रांति
उड़िया नववर्ष के प्रारंभ के पर्व को महा विशुभ संक्रांति कहते हैं जो मेष संक्रांति को पड़ता है। विशुभ संक्रांति अथवा पना संक्रांति उड़िया नववर्ष के आगमन का पर्व है। इस दिन उड़िया पंचाग शुरू होता है। इस अवसर को भगवान हनुमान की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।
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नवरात्रि के 9 दिनों में कलश स्थापना और अखंड ज्योति के साथ देवी दुर्गा की करवाएं विशेष पूजा।
 
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