जेठ माह हिंदू पंचांग का तीसरा महीना होता है। इस बार 8 मई से ज्येष्ठ आरंभ हो रहा है। जो 5 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा तक रहेगा। ज्येष्ठ के महीने में सूरज तेज रहता है जिसके कारण प्रचंड गर्मी पड़ती है। इसलिए ज्येष्ठ के महीने में पानी पिलाने और दान करने का विशेष महत्व होता है।
ज्येष्ठ महीने में जल का महत्व और त्योहार
जेठ के महीने में गर्मी ज्यादा पड़ने के कारण पानी का महत्व बढ़ जाता है। जेठ में सूर्य के रौद्र रूप से धरती में मौजूद पानी का वाष्पीकरण सबसे तेज हो जाता है जिसके कारण से नदियां और तालाब सूख जाते हैं। ऐसे में हमारे शास्त्रों में इस महीने में जल के संरक्षण का विशेष जोर दिया जाता है। जिसके चलते ज्येष्ठ महीने में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जैसे व्रत रखे जाते हैं। गंगा दशहरा में नदियों की पूजा और निर्जला एकादशी में बिना जल का व्रत रखा जाता है।
ज्येष्ठ माह के व्रत-त्योहार
नारद जयंती
नारद जयंती 'देवऋषि नारद मुनि' के जन्म दिवस के रूप में वैशाख कृष्ण प्रतिपदा के दिन मनाई जाती है। इस साल नारद जयंती 8 मई को है।
अपरा एकादशी
अपरा एकादशी 18 मई को है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अपरा एकादशी अथवा अचला एकादशी के नाम से जाना जाता है।
शनि जयंती
शनि जयंती पर्व 22 मई को है। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रति वर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है।
वट सावित्री व्रत
इस साल वट सावित्री व्रत 22 मई को है।
महेश नवमी
महेश नवमी 31 मई को है। महेश नवमी प्रतिवर्ष ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है।
गायत्री जयंती
गायत्री का पर्व 2 जून को है। यह पर्व मां गायत्री का जन्मोत्सव है।
निर्जला एकादशी
ज्येष्ठ मास में शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी और भीमसेनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है