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Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज शिव-पार्वती के पावन मिलन और अखंड सौभाग्य प्राप्ति करने का पर्व

Thu, 13 Aug 2026 06:49 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया।
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Hariyali Teej 2026 - फोटो : अमर उजाला AI
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विस्तार
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Hariyali Teej 2026: सावन का महीना आते ही प्रकृति अपने सुंदरतम रूप में दिखाई देने लगती है। काले मेघ, रिमझिम फुहारें, चारों ओर फैली हरियाली और पेड़ों पर पड़ते झूले सावन के उल्लास को बढ़ा देते हैं। इसी वातावरण में श्रावण शुक्ल तृतीया को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। मुख्य रूप से महिलाओं से जुड़ा यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति श्रद्धा, दांपत्य सुख, सौभाग्य और मनोकामना से जुड़ा है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ इस दिन मल्हार, झूले, मेहंदी और लोक परंपराएं तीज के उत्सव को और भी रंगीन बना देती हैं।

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शिव-पार्वती की पूजा से मांगें अखंड सौभाग्य
हरियाली तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसलिए इस दिन महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा कर अपने दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। पूजा में भगवान शिव को बेलपत्र, जल और पुष्प अर्पित किए जाते हैं, वहीं माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित कर अखंड सौभाग्य की प्रार्थना की जाती है।

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व्रत रखकर करें मनोकामना की पूर्ति
हरियाली तीज का व्रत महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन की सुख-शांति के लिए व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं मनचाहे और योग्य वर की प्राप्ति की कामना से तीज का व्रत करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए जिस कठिन तपस्या और संकल्प का पालन किया, उसी भाव से तीज का व्रत किया जाता है। दिनभर व्रत रखने के बाद शिव-पार्वती की पूजा और कथा श्रवण करने की परंपरा है।

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मेहंदी, हरी चूड़ियां और सुहाग सामग्री का धार्मिक भाव
हरियाली तीज पर हरे वस्त्र, हरी चूड़ियां, मेहंदी और सुहाग की सामग्री का विशेष महत्व माना जाता है। महिलाएं माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करती हैं और स्वयं भी सोलह श्रृंगार करती हैं। मेहंदी और चूड़ियां जहां तीज के श्रृंगार को पूर्ण करती हैं, वहीं धार्मिक रूप से इन्हें सौभाग्य और मंगल भावना से जोड़ा जाता है। इस दिन माता पार्वती का श्रद्धापूर्वक पूजन कर उनसे अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है।
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सिंजारा है बेटी के मंगल की कामना
तीज के अवसर पर सिंजारा भेजने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। विवाह के बाद पहला सावन आने पर नवविवाहिता को ससुराल से पीहर बुलाया जाता है और उसके लिए वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, मेहंदी, मिठाइयां आदि भेजी जाती हैं। इसे केवल पारिवारिक परंपरा ही नहीं, बल्कि बेटी के सुखी दांपत्य और मंगलमय जीवन की कामना से जुड़ा भाव भी माना जाता है। पीहर में बेटी का तीज मनाना परिवार के लिए आनंद का अवसर होता है। इस परंपरा में माता-पिता का आशीर्वाद और बेटी के सुखी जीवन की मंगलकामना छिपी होती है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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