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Happy Lohri 2022: लोहड़ी पर आज करें अग्निदेव और श्रीकृष्ण की आराधना, जानिए मुहूर्त और पूजा विधि

Thu, 13 Jan 2022 07:43 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Happy Lohri 2022: लोहड़ी का यदि शाब्दिक अर्थ लिया जाए तो ल का अर्थ लकड़ी, ओ का अर्थ उपले और ड़ी का अर्थ रेवड़ी से है। यानि तीनों शब्द के अर्थों को मिला कर लोहड़ी बना है। पूरे देश में लोहड़ी का पर्व धार्मिक आस्था, ऋतु परिवर्तन और कृषि उत्पादन से जुड़ा है।
 
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Lohri 2022 - फोटो : istock
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विस्तार
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Happy Lohri 2022: 13 जनवरी 2022 को पूरे देश में लोहड़ी का त्योहार धूम-धाम से मनाया जा रहा है। लोहड़ी परंपरागत रूप से किसान परिवारों में सबसे बड़ा उत्सव  है। लोहड़ी का यह त्योहार मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है। सिख धर्म के अनुसार लोहड़ी का त्योहार है नविवाहित जोड़ों और शिशुओं को बधाई देने का। सिंधी समाज में भी मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व लाल लोही के रूप में इस पर्व को मनाया जाता है। लोहड़ी को पहले तिलोड़ी कहा जाता था। लोहड़ी का यदि शाब्दिक अर्थ लिया जाए तो ल का अर्थ लकड़ी, ओ का अर्थ उपले और ड़ी का अर्थ रेवाड़ी से है। यानि तीनों शब्द के अर्थों को मिला कर लोहड़ी बना है। पूरे देश में लोहड़ी का पर्व धार्मिक आस्था, ऋतु परिवर्तन और कृषि उत्पादन से जुड़ा है। लोहड़ी की शाम को सभी लोग एक स्थान पर इकट्ठे होकर आग जलाते हैं और इसके इर्द-गिर्द नाचते-गाते हैं। इस दिन अग्नि देवता को खुश करने के लिए अलाव में गुड़, मक्का, तिल व फूला हुआ चावल जैसी चीजें भी चढ़ाई जाती हैं।आइए जानते हैं लोहड़ी के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में। साथ ही ये भी जानते हैं कि लोहड़ी की अग्नि में तिल क्यों चढ़ाया जाता है। 

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lohri - फोटो : अमर उजाला
लोहड़ी जलाने का शुभ मुहूर्त 
13 जनवरी को सायं 5 बजे के बाद रोहिणी नक्षत्र शुरू हो जाएगा। 
लोहड़ी जलाने का शुभ मुहूर्त आरंभ: सायं 5:43 मिनट से आरंभ 
लोहड़ी जलाने का शुभ मुहूर्त समाप्त: सायं 7: 25 मिनट तक 

लोहड़ी 2022
लोहड़ी में तिल अर्पित करने का कारण 
धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो तिल का विशेष महत्व है। गरुड़  पुराण के अनुसार, तिल भगवान विष्णु के शरीर से उत्पन्न हुआ है, इसलिए इसका उपयोग धार्मिक क्रिया-कलापों में विशेष रूप से किया जाता है। इसलिए लोहड़ी पर अग्नि में तिल विशेष रूप से डाला जाता है। आयुर्वेद की दृष्टि से देखें तो अग्नि में तिल डालने से वातावरण में बहुत से संक्रमण समाप्त हो जाते हैं और परिक्रमा करने से शरीर में गति आती है। तिल का प्रयोग हवन व यज्ञ आदि में भी किया जाता है। 

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लोहड़ी 2022 - फोटो : अमर उजाला
पूजा विधि 
  • लोहड़ी जलाने से पूर्व जहां लोहड़ी स्थापित कि है वहां पश्चिम दिशा में आदिशक्ति कि तस्वीर स्थापित करें। लोहड़ी पर भगवान श्रीकृष्ण, आदिशक्ति और अग्निदेव की आराधना की जाती है। 
  • इसके उपरांत उनके समक्ष सरसों तेल का दीपक जलाएं। 
  • उन्हें सिंदूर और बेलपत्र अर्पित करें। 
  • भोग के दौरान श्रीकृष्ण और अग्निदेव का भी आह्वान कर उन्हें तिल के लड्डू चढ़ाएं। 
  • इसके बाद सूखा नारियल लेकर उसमें कपूर डालें। 
  • अप लोहड़ी में अग्नि प्रज्ज्वलित करें। 
  • इसके उपरांत उसमें तिल का लड्डू, मक्का और मूंगफली अर्पित करें। 
  • और अंत में लोहड़ी की परिक्रमा करें। परिक्रमा 7 या 11 होनी चाहिए। 
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