3 जुलाई से नवरात्रि शुरू हो रहे हैं लेकिन यह नवरात्रि सामान्य नहीं बल्कि गुप्त नवरात्रि होगी, जिसमें गुप्त रूप से देवी मां की पूजा-आराधना की जाएगी है। सामान्य लोग इस नवरात्रि को नहीं करते। हिन्दी पंचांग के अनुसार एक वर्ष में कुल चार नवरात्रि आती हैं। जिसमें दो नवरात्रि सामान्य होती है जबकि दो नवरात्रि गुप्त होती है। दो सामान्य नवरात्रि में से एक चैत्र के महीने में और एक आश्विन के महीने में आती हैं। जबकि बाकी दो गुप्त नवरात्रि माघ और आषाढ़ के महीने में आती है।
9 की बजाय 10 देवियों की पूजा
आम तौर पर जहां नवरात्र में जहां नौ देवियों की विशेष पूजा का प्रावधान है, वहीं गुप्त नवरात्र में 10 महाविद्या की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्र में पूजी जाने वाली 10 महाविद्याओं में मां काली, मां तारा देवी, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला देवी हैं। इस नवरात्र में में तंत्र और मंत्र दोनों के माध्यम से भगवती की पूजा की जाती है।
क्यों गुप्त रूप से होती है देवी की पूजा
तांत्रिकों के लिए गुप्त नवरात्रि का महत्व बहुत अधिक होता है। इसमें गुप्त रूप से देवी मां की पूजा की जाती है। आषाढ़ मास के नवरात्रि में देवी की पूजा तंत्र-मंत्र के लिए की जाती है। देवी मां के हवन, पूजन आदि कर्म गुप्त रूप से रात के समय होती है इसलिए इसे गुप्त नवरात्रि कहते हैं।