दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर यह पर्व मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा को अन्नकूट भी किया जाता है। इस त्योहार में भगवान कृष्ण के साथ गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा का विधान है। इसी दिन भगवान कृष्ण को 56 भोग बनाकर लगाया जाता है।
कथा- आज के ही दिन टूटा था इंद्र का घमंड
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी उंगली से गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्र का अहंकार तोड़ा था। मान्यता के अनुसार जब भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को मूसलधार वर्षा से बचने के लिए सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाकर रखा था, जिसमें सभी को वर्षा से बचाने में कामयाब रहे और इसके बाद जब सातवें दिन भगवान ने गोवर्धन पर्वत को नीचे रखा तब से हर साल इस दिन गोवर्धन पूजा के रूप में मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में विविध प्रकार की खाद्य सामग्रियों से एक खास प्रसाद बनाया जाता है जिसे अन्नकूट कहते हैं।
पूजा विधि और महत्व
इस त्योहार पर सभी घरों के आंगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाया जाता है। इसके अलावा गायों और ग्वालों की मूर्तिया बनाई जाती है। इसके बाद गोबर से बने गोवर्धन पर्वत को फल और फूल से विशेष प्रकार से सजाया और संवारा जाता है। पूजा में भगवान कृष्ण को 56 तरह के भोग लगाए जाते हैं। पूजा में परिवार के सभी सदस्य गोवर्धन की पूजा और परिक्रमा करते हैं। ऐसी मान्यता है गोवर्धन पूजा से व्यक्ति को लंबी उम्र और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त
पहला मुहूर्त- प्रातः 06 : 41 मिनट से 08 : 50 मिनट तक
दूसरा मुहूर्त- सायंकाल 03 : 15 मिनट से 05 : 25 मिनट तक