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Govardhan Puja 2024: सुख समृद्धि के लिए गोवर्धन पूजा में जरूर करें गोवर्धन महाराज की आरती

Sat, 02 Nov 2024 02:00 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गोवर्धन पूजा के समय गोवर्धन महाराज की आरती जरूर करनी चाहिए। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। गोवर्धन महाराज और श्रीकृष्ण की आरती इस प्रकार है... 
 
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Govardhan Puja 2024 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Govardhan Maharaj Ki Aarti: आज यानी 2 नवंबर को देशभर में गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जा रहा है। ये पर्व दिवाली के एक दिन बाद मनाया जाता है, लेकिन इस बार दिवाली दो दिन होने के कारण ये पर्व 2 नवंबर को मनाया जा रहा है। प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह की प्रतिपदा को मनाया जाने वाला पर्व गोवर्धन पूजा का सीधा संबंध प्रकृति और मनुष्य से है। गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पूजा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि गोवर्धन पर्वत का पूजन करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा बरसाते हैं। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विधान है। इस दिन भगवान कृष्ण को 56 भोग भी लगाए जाते हैं। कहा जाता है कि इस दिन पूजा करने से घर में धन की बरकत होती है। पूजा के समय गोवर्धन महाराज की आरती जरूर करनी चाहिए। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। गोवर्धन महाराज और श्रीकृष्ण की आरती इस प्रकार है... 
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गोवर्धन महाराज की आरती

श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।

श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।

तोपे पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े,
तोपे पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े,
तोपे चढ़े ( जय हो )
तोपे चढ़े ( जय हो )
तोपे चढ़े दूध की धार, हो धार,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो,
श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।

तेरे कानन कुंडल साज रहे,
तेरे कानन कुंडल साज रहे,
ठोड़ी पे ( जय हो )
ठोड़ी पे ( जय हो )
ठोड़ी पे हीरा लाल, हो लाल,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो,
श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।

तेरे गले में कंठा सोने को,
तेरे गले में कंठा सोने को,
तेरी झांकी ( जय हो )
तेरी झांकी ( जय हो )
तेरी झांकी बनी विशाल, हो विशाल,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो,
श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।

तेरी सात कोस की परिक्रमा,
तेरी सात कोस की परिक्रमा,
और चकले ( जय हो )
और चकले ( जय हो )
और चकलेश्वर विश्राम, विश्राम,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो,
श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।

श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।


श्रीकृष्ण की आरती
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला 
श्रवण में कुण्डल झलकाला,नंद के आनंद नंदलाला

गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली
लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक

चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की, आरती कुंजबिहारी की…॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग,  मधुर मिरदंग ग्वालिन संग।

अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥

जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस।

जटा के बीच,हरै अघ कीच, चरन छवि श्रीबनवारी की
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की…॥

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू 
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू 

हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद।
टेर सुन दीन दुखारी की

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥

आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

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