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Govardhan Maharaj Ji Ki Aarti: गोवर्धन पूजा आज, सुख समृद्धि के लिए जरूर पढ़ें ये आरती

Tue, 14 Nov 2023 08:14 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि गोवर्धन पर्वत का पूजन करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं। कहा जाता है कि इस दिन पूजा करने से घर में धन की वृद्धि होती है। ऐसे में पूजा के समय गोवर्धन महाराज की आरती जरूरी करनी चाहिए।
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गोवर्धन पूजा - फोटो : Istock
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विस्तार
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Govardhan Maharaj Ki Aarti: इस बार गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन नहीं बल्कि 14 नवंबर को मनाई जा रही है और भाई दूज 15 नवंबर को मनाया जाएगा। वैसे तो ये पर्व दिवाली के एक दिन बाद मनाया जाता है, लेकिन इस बार प्रतिपदा तिथि 13 नवंबर को दोपहर 2:56 मिनट से आरम्भ हो रही है और इसीलिए उदिया तिथि का मान रखते हुए यह त्योहार 14 नवंबर को मनाया जाएगा। कार्तिक माह की प्रतिपदा को मनाया जाने वाले पर्व गोवर्धन पूजा का सीधा संबंध प्रकृति और मनुष्य से है। गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि गोवर्धन पर्वत का पूजन करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं। कहा जाता है कि इस दिन पूजा करने से घर में धन की वृद्धि होती है। ऐसे में पूजा के समय गोवर्धन महाराज की आरती जरूरी करनी चाहिए। गोवर्धन महाराज की आरती इस प्रकार है - 

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गोवर्धन महाराज की आरती

श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।

श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।

तोपे पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े,
तोपे पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े,
तोपे चढ़े ( जय हो )
तोपे चढ़े ( जय हो )
तोपे चढ़े दूध की धार, हो धार,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो,
श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।

तेरे कानन कुंडल साज रहे,
तेरे कानन कुंडल साज रहे,
ठोड़ी पे ( जय हो )
ठोड़ी पे ( जय हो )
ठोड़ी पे हीरा लाल, हो लाल,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो,
श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।

तेरे गले में कंठा सोने को,
तेरे गले में कंठा सोने को,
तेरी झांकी ( जय हो )
तेरी झांकी ( जय हो )
तेरी झांकी बनी विशाल, हो विशाल,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो,
श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।

तेरी सात कोस की परिक्रमा,
तेरी सात कोस की परिक्रमा,
और चकले ( जय हो )
और चकले ( जय हो )
और चकलेश्वर विश्राम, विश्राम,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो,
श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।

श्री गोवर्धन महाराज, महाराज,
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो ।

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