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Ganga Saptami 2021: इस कारण गंगा जी को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाए थे भागीरथ, जानें पूरी कथा

Tue, 18 May 2021 06:52 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गंगा सप्तमी 2021 - फोटो : अमर उजाला
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Ganga Saptami 2021 Date: गंगा सप्तमी पर्व 18 मई को है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव शंकर की जटाओं में पहुंची थीं इसलिए इस दिन को गंगा जयंती और गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। आइए जानते हैं गंगा सप्तमी की पूजा विधि, महत्व और इससे जुड़ी कथा क्या है।

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इस पूजा विधि से करें मां गंगा की आराधना
  • सूर्योदय से पूर्व नहाने के पानी में कुछ बूँदें गंगाजल की डालकर स्नान करें। 
  • स्नान करते समय 'ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः'' का जाप करें।
  • इसके बाद उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में गंगा मैया का ध्यान करें।
  • पुष्प अर्पित कर दीपक प्रजवल्लित करके मां की आरती गाएं।

मां गंगा का धार्मिक महत्व
गंगा सप्तमी के दिन गंगा नदी में स्नान करने से सभी तरह के पाप मिट जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन गंगाजी में डुबकी लगाने से जीवन के सभी दुखों से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन दान-पुण्य को भी विशेष महत्व दिया जाता है। पुराणों के अनुसार भगीरथी के अथक प्रयास से ही गंगा भगवान शिव की जटाओं से होती हुई पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। 
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गंगा सप्तमी की कथा
पौराणिक काल में भागीरथ नाम के एक प्रतापी राजा थे। उन्होंने अपने पूर्वजों को मुक्ति देने के लिए गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए ठान ली थी। इसके लिए उन्होंने गंगाजी की कठोर तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न होकर गंगाजी स्वर्ग से पृथ्वी पर आने के लिए तैयार हो गईं। उन्होंने भागीरथ से कहा कि अगर मेरी जलधार सीधे स्वर्ग से पृथ्वी पर गिरेगी तो पृथ्वी उसका वेग सहन नहीं कर पाएगी और चारों तरफ जलमय हो जाएगा। यह सुनकर भागीरथ सोच में पड़ गए और इसके लिए उन्होंने भगवान शिव की तपस्या शुरू कर दी। 

भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने दर्शन दिए और वर मांगने को कहा। भागीरथ ने अपनी समस्या भगवान शिव को बता दी। गंगा जैसे ही स्वर्ग से पृथ्वी पर गिरीं तो भगवान शिव ने पहले अपनी जटाओं में उनको कैद कर लिया और फिर जटा से एक धारा पोखर में छोड़ दी, वहां से गंगा की सात धारा प्रवाहित हुईं। इस प्रकार भागीरथ पृथ्वी पर गंगा को ले आए और अपने पूर्वजों को मुक्ति दिलाई। युगों-युगों तक बहने वाली गंगा लोगों के लिए जीवनदायिनी, मोक्षदायिनी बन गईं।
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