गणेश उत्सव का पर्व 13 सितंबर से आरम्भ होने जा रहा है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी की मध्याह्र में भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इसी तिथि पर हर वर्ष गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। भगवान गणेश विध्नहर्ता और विघ्नकर्ता दोनों है और यह वैभव और सम्पत्ति को दाता है। क्या आप जानते हैं भगवान गणेश को वैभव और सुख के दाता की शक्तियां कहां से और कैसे प्राप्त हुई आइए जानते हैं इसके पीछे की कथा।
भगवान गणेश को लिया था गोद
माता लक्ष्मी की कोई अपनी संतान नहीं थी। इस बात को लेकर एक बार भगवान विष्णु ने माता लक्ष्मी को उनके अहम भाव के कारण संतान सुख के अभाव वाली बात पर उन्हें चिंता में डाल दिया। भगवान विष्णु की बात सुनकर लक्ष्मी बहुत चिंतित होकर अपनी बहन पार्वती जी के पास पहुंची और अपनी सारी पीड़ा उन्हें सुनाई। माता लक्ष्मी ने पार्वती जी कहा कि तुम्हारे दो पुत्र है अगर इनमें से एक मुझे दे दो तो मैं भी मातृत्व का सुख प्राप्त कर सकूंगी। माता लक्ष्मी की पीड़ा को समझकर उन्होंने उन्हें भगवान गणेश को गोद दे दिया।
संतान सुख प्राप्त कर माता लक्ष्मी बहुत प्रसन्न हुई और उन्होंने अपनी समस्त सिद्धियां और सुख सम्पत्तियां भगवान गणेश को प्रदान कर दी। इसके अलावा उनका विवाह सिद्धि और रिद्धि कर दिया। तभी से वैभव और सुख की प्राप्ति के लिए माता लक्ष्मी की पूजा के साथ भगवान गणेश की भी पूजा होने लगी। यही कारण है कि दीवाली के दिन माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की भी पूजा जरूर की जाती है।