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गणेशोत्सव 2026: आज गणेश चतुर्थी पर गणपति पूजा-स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजन-विधि, मंत्र और आरती

Mon, 14 Sep 2026 12:45 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

आज गणेश चतुर्थी है और आज घरों और पंडालों में भगवान गणपित विराजेंगे। भक्त सुबह से ही विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना करते हुए भगवान गणपति की स्थापना करते हैं। आइए जानते हैं शुभ मुहूर्त। 
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गणेश चतुर्थी 2026 - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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आज गणेश चतुर्थी है। हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी को एक खास और पवित्र त्योहार माना जाता है। इस तिथि पर देशभर में विशेष रूप से महाराष्ट्र में गणेश के जन्मोत्सव के रूप में जोश, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस हर वर्ष गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। महाराष्ट्र समेत देश के दूसरे राज्यों में इस दिन बड़े-बड़े पंडालों में गणपति की मूर्ति की स्थापना होती है। गणेश उत्सव का पर्व लगातार 10 दिनों तक चलता है। जिसमें  भगवान गणेश को प्रथम पूज्य, विध्नहर्ता, बुद्धि, विवेक और मंगलकर्ता के रूप में पूजे जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से सभी तरह के कार्यों आने वाली बाधाएं दूर होते हैं और सुख-समृद्धि और सफलता के द्वार खुल जाते हैं। इस वर्ष गणेश चतुर्थी का त्योहार 14 सितंबर यानी आज मनाया जा रहा है जिसमें रवि, इंद्र और ब्रह्रा योग का संयोग बन रहा है। आइए जानते हैं तिथि, मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त, मंत्र और आरती।
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गणेश चतुर्थी तिथि 2026 
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 7 मिनट पर हो गई है, जिसका समापन 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 43 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार गणेश उत्सव आज यानी 14 सितंबर को मनाई जा रही है। जो 10 दिनों तक चलेगी और अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन होगा। 

गणेश चतुर्थी 2026 और गणपति मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त 
शास्त्रों के अनुसार गणेश चतुर्थी पर भगवान गणपति की मूर्ति की स्थापना और पूजा के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त दोपहर का होता है। ऐसे में आज भगवान गणेश की स्थापना और पूजा के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 11 बजकर 21 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। जिसमें भगवान गणेश की प्रतिमा को विधि-विधान के साथ घर में स्थापित कर सकते हैं। 
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गणेश पूजा और स्थापना का शुभ मुहूर्त 
मध्याह्र गणेश स्थापना का मुहूर्त- दोपरर 12 बजक 09 मिनट से लेकर 12 बजकर 58 मिनट तक।
गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त- मध्याह्र 11 बजकर 20 मिनट से लेकर 01 बजकर 48 मिनट तक।
शाम के लिए पूजा गोधूलि मुहूर्त- शाम 06 बजकर 42 मिनट से लेकर 07 बजकर 05 मिनट तक।

गणेश मूर्ति स्थापना विधि
  • गणेश चतुर्थी के दिन सबसे पहले जल्दी सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ-सुथरा वस्त्र पहनें।
  • फिर इसके बाद पूजा का संकल्प लेते हुए भगवान गणेश का स्मरण करते हुए अपने कुल देवता का नाम मन में लें।
  • इसके बाद पूजा स्थल पर पूर्व की दिशा में मुंह करके आसन पर बैठ जाएं।
  • फिर छोटी चौकी पर लाल या सफेद कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर एक थाली में चंदन,कुमकुम, अक्षत से स्वस्तिक का निशान बनाएं।
  • थाली पर बने स्वस्तिक के निशान के ऊपर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करते हुए पूजा आरंभ कर दें।
  • पूजा करने ले पहले इस मंत्र का जाप करें।
  • गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारु भक्षणम्ं। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥
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गणपति पूजा के लिए गणेश मंत्र:
मूल एवं सर्वप्रिय मंत्र
मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः॥

विघ्नविनाशक मंत्र (बाधाएं दूर करने के लिए)
मंत्र:
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥


कार्य सिद्धि एवं रिद्धि-सिद्धि मंत्र
मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥

शुभ-लाभ एवं संकट नाशक मंत्र
मंत्र: ॐ लम्बोदराय नमः॥ या ॐ विघ्नेश्वराय नमः॥

गणेश जी की आरती

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे,
मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे,
संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत,
निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

‘सूर’ श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो,
जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥
 
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