गणेश चतुर्थी का पर्व हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन घर-घर में विघ्नहर्ता श्री गणेश का आगमन होता है। धार्मिक मान्यता है कि गणपति जी का आगमन घर को सुख-समृद्धि, वैभव और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। वहीं वास्तु शास्त्र में भी यह बताया गया है कि यदि प्रतिमा का स्वरूप और स्थापना मनोकामना के अनुसार चुना जाए तो वह विशेष फलदायी सिद्ध होती है।
1. शिक्षा और ज्ञान की प्राप्ति के लिए-पुस्तक और कलम धारण किए गणेश
यदि घर में बच्चे पढ़ाई में उन्नति चाहते हैं तो उन्हें ऐसी गणेश प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए जिसमें गणपति जी हाथ में पुस्तक या कलम लिए हों। यह प्रतिमा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में रखनी चाहिए। इससे बुद्धि का विकास होता है और विद्यार्थियों को मनचाही सफलता मिलती है।
2. धन और व्यवसायिक सफलता के लिए- मोदक और गजमुख वाले गणेश
धन की प्राप्ति और व्यवसाय में उन्नति के लिए वह प्रतिमा शुभ मानी जाती है जिसमें गणेश जी के हाथ में मोदक हो और उनका मुख स्पष्ट रूप से गजमुख स्वरूप में दिखता हो। ऐसी प्रतिमा को उत्तर दिशा में रखना श्रेष्ठ है। मान्यता है कि इससे घर में लक्ष्मी का वास होता है और आय के साधन बढ़ते हैं।
3. विवाह योग्य युवाओं के लिए-रिद्धि-सिद्धि संग गणेश
जो युवक-युवतियां विवाह में विलंब का सामना कर रहे हों, उन्हें रिद्धि-सिद्धि संग विराजमान गणेश की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। इस प्रतिमा को घर में रखना शुभ माना गया है। इससे दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि और शीघ्र विवाह के योग बनते हैं।
4. संतान सुख की प्राप्ति के लिए- बाल गणेश
संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपत्ति को बाल गणेश की प्रतिमा घर में लानी चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि बाल स्वरूप गणेश कृपा से संतान सुख प्राप्त होता है।
5. पारिवारिक सुख और शांति के लिए- बैठे हुए गणेश
घर में शांति और पारिवारिक सौहार्द बनाए रखने के लिए बैठी हुई मुद्रा वाले गणेश जी को स्थापित करना चाहिए। यह प्रतिमा बैठक कक्ष (ड्राइंग रूम) या पूजा घर में रखी जानी चाहिए। बैठे हुए गणपति स्थिरता और शांति का प्रतीक होते हैं।
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6. नृत्य करती प्रतिमा- घर में सकारात्मक ऊर्जा के लिए
यदि कोई व्यक्ति अपने घर में उत्साह, ऊर्जा और रचनात्मकता चाहता है तो उसे नृत्य करते हुए गणेश जी की प्रतिमा रखनी चाहिए। इसे पूजाघर या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना शुभ होता है। ऐसी प्रतिमा घर में सदा आनंद और सकारात्मकता बनाए रखती है।
7. सूंड का स्वरूप- बाईं ओर मुड़ी सूंड गृहस्थ जीवन के लिए
वास्तु मान्यता है कि घर में रखी जाने वाली गणेश प्रतिमा की सूंड हमेशा बाईं ओर मुड़ी हुई होनी चाहिए। यह गृहस्थ जीवन के लिए मंगलकारी मानी जाती है। दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी का पूजन विशेष अनुष्ठानों से किया जाता है, इसलिए उन्हें गृहस्थ के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता।