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Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी आज, मनोकामना अनुसार गणेश प्रतिमा की पूजा से मिलता है शुभ फल

Wed, 27 Aug 2025 11:39 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

हिंदू धर्म में शुद्ध जगहों की मिट्टी से बनी मूर्तियों का विशेष महत्व होता है। गणेश चतुर्थी के दिन घर पर विराजमान होने वाले भगवान गणेश की मूर्ति को शुद्ध मिट्टी और गंगाजल से बनी गणेश प्रतिमा की पूजा का विशेष महत्व होता है।
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Ganesh Chaturthi Naam Mantra Jaap - फोटो : amarujala
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विस्तार
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आज बुधवार, 27 अगस्त को गणेश चतुर्थी है और आज से ही अगले 10 दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव की शुरुआत हो गई है। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को बहुत ही पूजनीय देवता है माना जाता है और किसी भी शुभ काम करने से पहले या फिर किसी तरह का शुभ और मांगलिक आयोजन में सबसे पहले इन्ही की पूजा होती है। गणेश चतुर्थी पर गणपति को घरों और पांडालों में विराजित किया जाता है। फिर विधि विधान के साथ पूजा अर्जना की जाती है।  ऐसी मान्यता है कि विघ्नहर्ता श्री गणेश की कृपा से हर प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश जी की मूर्ति और स्वरूप भी उनकी पूजा के फलों को प्रभावित करते हैं। विभिन्न प्रकार के गणेश जी अलग-अलग कामनाओं की पूर्ति करते हैं और भक्तों को विशिष्ट वरदान देते हैं।
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श्वेतार्क गणेश जी : धन और स्थायी समृद्धि का वरदान
हिंदू धर्म में श्वेतार्क के पौधे की जड़ को बहुत पवित्र और पूजनीय मानी जाती है। इसकी जड़ से निर्मित गणेश जी की मूर्ति अत्यंत दुर्लभ और चमत्कारी मानी जाती है। इसे घर में स्थापित करने से लक्ष्मी प्राप्ति होती है और धन संबंधी बाधाएं दूर होती हैं। मान्यता है कि श्वेतार्क गणेश जी की पूजा करने से घर में स्थायी सुख-समृद्धि का वास होता है।

शुद्ध मिट्टी के गणेश जी : पंचतत्व स्वरूप से पुण्य लाभ
हिंदू धर्म में शुद्ध जगहों की मिट्टी से बनी मूर्तियों का विशेष महत्व होता है। गणेश चतुर्थी के दिन घर पर विराजमान होने वाले भगवान गणेश की मूर्ति को शुद्ध मिट्टी और गंगाजल से बनी गणेश प्रतिमा की पूजा का विशेष महत्व होता है। मिट्टी से बनी गणेश जी की मूर्ति को पंचतत्वों का प्रतीक माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। 
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स्वर्ण गणेश जी : वैभव, करियर और उन्नति के लिए श्रेष्ठ
मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा के अलावा बहुत से लोग स्वर्ण से निर्मित गणेशी जी मूर्ति को स्थापित कर पूजन किया जाता है। जो लोग अपने व्यापार, करियर और मान-सम्मान में वृद्धि की कामना रखते हैं वे स्वर्ण से बनी गणेश जी मूर्ति की पूजा करते हैं।

रजत गणेश जी : मानसिक शांति और सौभाग्य का वास
सोने के अलावा चांदी की गणेश प्रतिमा की पूजा घर में करने से सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। गणेश चतुर्थी पर घर पर रजत गणेश जी की स्थापना करने से सौहार्द और सुख-शांति बनी रहती है।
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स्फटिक गणेश जी : स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा के स्रोत
घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि के लिए स्फटिक से बनी गणेश प्रतिमा का पूजन स्वास्थ्य लाभ और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए श्रेष्ठ माना गया है। 

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काष्ठ गणेश जी : ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति का साधन
काष्ठ से निर्मित गणेश जी, विशेषकर नीम या पीपल की लकड़ी से बनी प्रतिमा, विद्यार्थियों और ज्ञान की साधना करने वालों के लिए अत्यंत लाभकारी मानी गई है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस प्रतिमा की पूजा करने से बुद्धि, ज्ञान और विवेक की प्राप्ति होती है।

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