1.मोदक
मोदक भगवान गणेश का सबसे प्रिय भोग है। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि जब गणेश जी ने ब्रह्मांड की परिक्रमा की थी, तब माता पार्वती ने उन्हें मोदक का भोग दिया था। मोदक का आकार तिकोना और गोल होता है, जो मिठास और आनंद का प्रतीक है। इसे विशेष रूप से चावल के आटे, नारियल और गुड़ से बनाया जाता है। गणेश चतुर्थी पर इसे अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है।
2. लड्डू
गणेश जी को बेसन के लड्डू और मोतीचूर के लड्डू भी अत्यधिक प्रिय हैं। यह भोग भक्त गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए अर्पित करते हैं। लड्डू का गोलाकार आकार संपन्नता और पूर्णता का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति गणेश जी को लड्डू अर्पित करता है, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
3. दूर्वा
दूर्वा घास का अत्यधिक महत्व है और गणेश जी को इसे चढ़ाने से वे अति प्रसन्न होते हैं। दूर्वा तीन या पांच पत्तियों वाली होनी चाहिए और इसे गणेश जी की प्रतिमा या मूर्ति पर अर्पित करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि दूर्वा चढ़ाने से भगवान गणेश जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की समस्त इच्छाएँ पूरी करते हैं।
4. गुड़धानी
गणेश चतुर्थी के दिन,गौरी नंदन को गुड़धानी का भोग अर्पित करना अत्यधिक शुभ माना गया है। मान्यता है कि गुड़धानी का भोग गणेश जी को चढ़ाने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है।
5. पान और सुपारी
भगवान गणेश को पान-सुपारी का भोग अर्पित करने की परंपरा भी प्राचीन है। पान की पत्तियाँ गणेश जी को समर्पित करने से वे विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं और भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। इसे चढ़ाते समय पत्तियों के ऊपर चूना, कत्था और सुपारी रखकर अर्पित किया जाता है।
6. फल
गणेश जी को अलग-अलग प्रकार के फलों का भोग भी प्रिय है। इनमें विशेष रूप से केले, अनार, सेव और नारियल प्रमुख हैं। ये फल शुभता और समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं। गणेश जी को नारियल का भोग अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं और समस्त विघ्नों का नाश करते हैं।
7. खीर
खीर भी गणेश जी का प्रिय भोग माना जाता है। यह दूध, चावल और चीनी से बनाई जाती है और भगवान गणेश को विशेष अवसरों पर अर्पित की जाती है। खीर का भोग गणेश जी को समर्पित करने से सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।