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Ganesh Chaturthi 2022: जानिए आखिर क्यों की जाती है गणेशजी की स्थापना और विसर्जन ?

Wed, 31 Aug 2022 06:10 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद

सार

एक तरफ जहां गणेश चतुर्थी को घर में गणेशजी की स्थापना की जाती है वहीं अनंत चतुर्दशी के दिन उनके विग्रह को जलाशय,नदी या समुद्र में विसर्जित कर दिया जाता है। जानिए आखिर ऐसा क्यों किया जाता है।
 
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गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Ganesh Chaturthi 2022 Date Time Ganpati Sthapana Muhurat : गणेश चतुर्थी के उत्सव की तैयारी हर घर में शुरू हो चुकी है। गणपति बप्पा को अपने घर में निमंत्रित करने के लिए हम सभी उत्साहित हैं। इस उत्सव का प्रारंभ 31 अगस्त से शुरू होकर 9 सितम्बर यानि अनंत चतुर्दशी तक चलेगा। एक तरफ जहां गणेश चतुर्थी को घर में गणेशजी की स्थापना की जाती है वहीं अनंत चतुर्दशी के दिन उनके विग्रह को जलाशय,नदी या समुद्र में विसर्जित कर दिया जाता है। जानिए आखिर ऐसा क्यों किया जाता है।

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महर्षि वेदव्यास से जुडी है कथा   
पौराणिक मान्यता के अनुसार महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना के लिए गणेशजी का आह्नान किया था। उनसे महाभारत को लिपिबद्ध करने की प्रार्थना की। गणेश जी ने उनकी प्रार्थना को स्वीकार तो किया परन्तु उन्होंने एक शर्त रखी 'कि मैं जब लिखना प्रारंभ करूंगा तो कलम को रोकूंगा नहीं,यदि कलम रुक गई तो लिखना बंद कर दूंगा'। तब वेदव्यासजी ने कहा कि भगवन आप देवताओं में अग्रणी हैं,विद्या और बुद्धि के दाता हैं और मैं एक साधारण ऋषि हूं। यदि किसी श्लोक में मुझसे त्रुटि हो जाय तो आप उस श्लोक को ठीक कर उसे लिपिबद्ध करें। 

गणपति जी ने सहमति दी और दिन-रात लेखन कार्य प्रारम्भ हुआ और इस कारण गणेश जी को थकान तो होनी ही थी,लेकिन उन्हें पानी पीना भी वर्जित था। अतः गणपति जी के शरीर का तापमान बढ़े नहीं, इसलिए वेदव्यास ने उनके शरीर पर मिट्टी का लेप किया और भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश जी की पूजा की। मिट्टी का लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गई, इसी कारण गणेश जी का एक नाम पार्थिव गणेश भी पड़ा। 
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महाभारत का लेखन कार्य 10 दिनों तक चला और अनंत चतुर्दशी को लेखन कार्य संपन्न हुआ। वेदव्यास ने देखा कि गणपति का शारीरिक तापमान फिर भी बहुत बढ़ा हुआ है और उनके शरीर पर लेप की गई मिट्टी सूखकर झड़ रही है,तो वेदव्यास ने उन्हें पानी में डाल दिया। इन दस दिनों में वेदव्यास ने गणेश जी को खाने के लिए विभिन्न पदार्थ दिए।  इसलिए गणेश चतुर्थी पर गणेशजी को स्थापित किया जाता है और 10 दिन मन,वचन कर्म और भक्ति भाव से उनकी उपासना करके अनंत चतुर्दशी को विसर्जित कर दिया जाता है।

मिट्टी के बिठाएं गणेशजी
प्रकृति में पीओपी से बनी मूर्तियों का जहर न फैले इसलिए हर घर-पांडाल में मिट्टी के गणेश की स्थापना होनी चाहिए।धार्मिक मान्यता के अनुसार मिट्टी के गणेश की प्रतिमा पंचतत्व यानि भूमि,जल,वायु,अग्नि और आकाश का प्रतिनिधित्व करती है इसलिए मिट्टी के गणेश की प्रतिष्ठा करने से  हर कार्य सिद्ध होते हैं।

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