Ekadashi Kab Hai: अधिक मास की एकादशी पर कई तरह के शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। आइए जानते हैं कब है एकादशी और इसका क्या है खास महत्व, पूजा विधि, तिथि और क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
Ekadashi Kab Hai: एकादशी तिथि भगवान विष्णु को अतिप्रिय है व अधिक मास भी श्री विष्णुजी को समर्पित है, इसलिए धार्मिक दृष्टि से इस एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भक्तों द्वारा इस दिन की जाने वाली पूजा एवं व्रत का विशेष पुण्य प्राप्त होगा। इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी संताप नष्ट होते है एवं भगवान विष्णु के साथ श्रीमहालक्ष्मी जी की अनुकूल कृपा प्राप्त होती है। इस दिन व्रत रखने से रुके हुए कार्यों में सफलता मिलती है तथा जिन लोगों को बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है उनके लिए यह व्रत शुभफलदायी बताया गया है।लेकिन एकादशी व्रत में कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी है।
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कब है एकादशी (ekadashi kab hai)
शास्त्रों में पुरुषोत्तम माह की परमा एकादशी का बहुत महत्व बताया गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 10 जून की मध्यरात्रि करीब 12:57 बजे से रात 10:36 बजे तक रहेगी, उदया तिथि के आधार पर एकादशी का व्रत 11 जून को मनाई जाएगी।
परमा एकादशी पर बनेगा शुभ संयोग
हिंदू धर्म में अधिक मास में पड़ने वाली एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष अधिकमास पड़ने पर परमा एकादशी 11 जून को है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार परमा एकादशी पर शोभन और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। जिसे बहुत ही शुभ योग माना जाता है। आइए जानते है परमा एकादशी पर क्या करें और क्या नहीं।
पुण्यफल में वृद्धि के लिए इस दिन समस्त कामनाओं तथा सिद्धियों के दाता भगवान विष्णु की पूजा ईशान कोण में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करते हुए करें।
अधिक माह में तुलसी पूजन का बहुत अधिक महत्व है इसलिए इस एकादशी पर भगवान विष्णु की प्रिय तुलसी की मंजरी तथा पीला चन्दन,रोली,अक्षत,पीले पुष्प, ऋतु फल एवं धूप-दीप,मिश्री आदि से भगवान दामोदर का भक्ति-भाव से पूजन करना चाहिए।इस दिन तुलसी के पत्र नहीं तोड़ने चाहिए,शास्त्रों में ऐसा करना वर्जित बताया गया है।
इस दिन गीता पाठ,विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ,श्री सूक्त व 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करने से प्राणी पापमुक्त-कर्जमुक्त होकर लक्ष्मी-नारायण की कृपा पाता है ।
एकादशी व्रत की सिद्धि के लिए भगवान विष्णु के समक्ष घी का अखंड दीपक जलाएं।
इस दिन दीपदान करना शुभ माना गया है। सुख-सौभाग्य में बढ़ोतरी के लिए इस दिन आसमान के नीचे सांयकाल घरों,मंदिरों,पीपल के वृक्षों तथा तुलसी के पौधों के पास दीप प्रज्वलित करने चाहिए।
रात्रि के समय श्री हरि की प्रसन्नता के लिए नृत्य,भजन-कीर्तन और स्तुति के द्वारा जागरण करना चाहिए।जागरण करने वाले को जिस फल की प्राप्ति होती है,वह हज़ारों बर्ष तपस्या करने से भी नहीं मिलता।
यह एकादशी गर्मी ऋतु में पड़ने के कारण इस गर्मी से राहत देने वाली वस्तुओं का दान करना चाहिए।इस दिन छाता,वस्त्र,अन्न,गुड़,धार्मिक पुस्तकें एवं फल आदि का दान करना बहुत ही लाभकारी माना गया है।
भगवान श्री कृष्ण को गाय अत्यंत प्रिय है। इस दिन गायों को चारा खिलाने और उनकी देखवाल करने से भगवान श्री कृष्ण का आशीर्वाद मिलता है।
पुरुषोत्तमा एकादशी की कथा पढ़ने या सुनने से भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। द्वादशी के दिन सूर्योदय के बाद विधिपूर्वक ब्राह्मण को भोजन करवाकर एवं दक्षिणा देकर तत्पश्चात अन्न व जल ग्रहण करें।
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एकादशी पर क्या न करें
इस तिथि पर लहसुन, प्याज, मांस, मछली, अंडा आदि तामसिक आहार के सेवन से भी दूर रहना चाहिए एवं दिन में नहीं सोना चाहिए।इसके अलावा किसी का अपमान न करें।
एकादशी के दिन चावल नहीं खाने चाहिए ।जो लोग एकादशी का व्रत नहीं करते उन्हें भी चावल नहीं खाना चाहिए।धार्मिक मान्यता के अनुसार इस तिथि को इनको जीव रूप मानते हुए एकादशी को भोजन के रूप में ग्रहण करने से परहेज किया गया है , ताकि सात्विक रूप से विष्णु प्रिया एकादशी का व्रत संपन्न हो सके।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।