रमजान का पवित्र महीना खत्म हो गया और चांद दिखते ही पहली शव्वाल को ईद-उल-फितर मनाई जाएगी। फितर अरबी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब होता है फितरा अदा करना। इसे ईद की नमाज पढ़ने से पहले अदा करना होता है। फितरा हर मुसलमान पर वाजिब है और अगर इसे अदा नहीं किया गया, तो फिर ईद नहीं मनाई जा सकती है।
दरअसल ईद एक तोहफा है, जो अल्लाह रब्बुल इज्जत अपने बंदों को महीने भर रोजे रखने के बाद देते हैं। ऐसा मानना है कि ईद का दिन मुसलमानों के लिए इनाम का दिन होता है। यह दिन आसूदगी और आफीयत के साथ गुजारना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की इबादत करनी चाहिए।
ईद-उल-फितर को मीठी ईद भी कहा जाता है। सेवइयों और शीर-खुरमे की मिठास में लोग अपने दिल में छुपी कड़वाहट को भी भुला देते हैं। ईद का यह त्योहार न सिर्फ मुसलमान मनाते हैं, बल्कि सभी लोग इस मुक्कदस दिन की खुशी में शरीक होते हैं।