हर वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि तिथि को दशहरा का त्योहार बड़े ही जोश, उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। हिंदू धर्म में दशहरे के त्योहार को विजयादशी भी कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरे के दिन ही भगवान श्रीराम ने लंका नरेश रावण का वध किया था, जिसे अन्याय पर न्याय की जीत के रूप में मनाया जाता है। इस दिन रामलीला का आयोजन होता है जिसमें मंचन करते हुए रावण के पुतले को जलाया जाता है। इस दिन रावण के पुतले के साथ-साथ मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों का भी दहन किया जाता है। दशहरे पर प्रदोष काल में रावण के दहन के साथ अहंकार, अन्याय और अर्धम के नाश का प्रतीक माना जाता है। आइए जानते हैं दशहरा की सही तिथि, रावण दहन का मुहूर्त और धार्मिक महत्व...
कब है दशहरा 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि की शुरुआत 20 अक्तूबर 2026 दोपहर 12 बजकर 50 मिनट लेकर 21 अक्तूबर 2026 को दोपहर 02 बजकर 11 मिनट पर रहेगा। ऐसे में दशहरा 20 अक्तूबर को देशभर में मनाया जाएगा।
दशहरा पर बनेगा शुभ योग
इस वर्ष दशहरा पर एक साथ कई तरह के शुभ योगों का निर्माण होगा। दशहरा पर श्रवण नक्षत्र का संयोग बनेगा। पंचांग के अनुसार श्रवण नक्षत्र 19 अक्तूबर को दोपहर 03 बजकर 38 मिनट से आरंभ होकर 20 अक्तूबर को शाम 06 बजकर 02 मिनट तक रहेगा।
दशहरा का महत्व
हिंदू धर्म में विजयादशमी के त्योहार का विशेष महत्व होता है। विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। इस दिन रावण के दस सिरों के साथ व्यक्ति के अंदर छिपी 10 तरह की नकारात्मक गुणों का प्रतीक माना जाता है। दशहरा पर रावण के दहन के साथ नया कार्य शुरू करने , व्यापार आरंभ करने के साथ शस्त्र पूजन का शुभ माना जाता है। इससे अलावा दशहरे पर दस दिनों तक चले युद्ध में मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया। इस कारण शस्त्र पूजा, दुर्गा पूजा, राम पूजन और शमी पूजन का इस दिन विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन आरंभ किया गया कोई भी कार्य सफल होता है। इसी दिन दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन कर दुर्गोत्सव का समापन भी होता है। साथ ही चंडी पाठ, दुर्गा सप्तशती का पाठ और हवन का विशेष महत्व है।