Diwali Puja Muhurat 2025 Time And Puja Vidhi: दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना का विशेष विधान होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली पर शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी पूजन करने से घर में सुख,समृद्धि, धन और वैभव का स्थायी वास होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन करने के लिए शुभ मुहूर्त 20 अक्तूबर को शाम 07 बजकर 08 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 18 मिनट तक रहेगा।
Diwali Puja Muhurat 2025 Time: कार्तिक मास में बुद्धि के दाता, विघ्नहर्ता श्रीगणेश और धन-ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए दिवाली का दिन बहुत खास माना गया है। इस दिन भगवान राम असुरों का संहार करके अयोध्या लौटे थे, जिनका दीपोत्सव करके स्वागत किया गया था। दिवाली का दिन लक्ष्मी के स्वागत का दिन है। हम चारों ओर प्रकाश फैलाकर सकारात्मकता के साथ महालक्ष्मी से समृद्धि और सम्पन्नता मांगते हैं। शक्ति आराधना यानि काली पूजा के लिए भी यह कार्तिक अमावस्या सर्वोपरि मानी गई है। आइए जानते हैं दिवाली पर कैसे करें लक्ष्मी जी की पूजा और पूजन के लिए क्या रहेगा मुहूर्त का समय।
विज्ञापन
2 of 8
Diwali 2025 Laxmi Puja Muhurat
- फोटो : adobe
दीपावली 2025- लक्ष्मी पूजा मुहूर्त Diwali Puja Muhurat 2025 Time
हिंदू धर्म में दिवाली के त्योहार का विशेष महत्व होता है। पंचांग के अनुसार यह पर्व हर साल कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। दिवाली पर विशेष रूप से घरों को दीयों और रंगीन लाइटों से सजाया जाता है। दिवाली का रात को दीप प्रज्जवलित करके प्रकाश का पर्व मनाया जाता है। दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना का विशेष विधान होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली पर शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी पूजन करने से घर में सुख,समृद्धि, धन और वैभव का स्थायी वास होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन करने के लिए शुभ मुहूर्त 20 अक्तूबर को शाम 07 बजकर 08 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। इस तरह के पूजन के लिए कुल 01 घंटा 11 मिनट का समय मिलेगा। शास्त्रों के अनुसार, दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के लिए सबसे अच्छा समय अमावस्या तिथि, प्रदोष काल और स्थिर लग्न को माना जाता है। इससे अलावा भी अलग-अलग प्रयोजनों के लिए कई तरह के मुहूर्त होते हैं जिसमें लक्ष्मी पूजन किया जाता है।
विज्ञापन
3 of 8
Diwali 2025 Laxmi Puja Muhurat
- फोटो : adobe
दीपावली 2025- शुभ तिथि
अमावस्या तिथि प्रारम्भ - 20 अक्तूबर को शाम 03:44
अमावस्या तिथि समाप्त - 21 अक्टूबर को शाम 05:54
4 of 8
Diwali 2025 Laxmi Puja Muhurat
- फोटो : adobe
दीपावली 2025- लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (प्रदोष काल)
शाम 07:08 से 08:18 तक
अवधि- 1 घंटे 11 मिनट प्रदोष काल- 05:46 से 08:18 तक वृषभ काल- 07:08 से 09 :03 तक
विज्ञापन
5 of 8
Diwali 2025 Laxmi Puja Muhurat
- फोटो : adobe
दीपावली 2025- शुभ चौघड़िया पूजा मुहूर्त
अमृत: प्रात: 6:25 से 7:52 तक
शुभ: सुबह 9:18 से 10:45 तक
लाभ: दोपहर 3:04 से 4:31 तक
अमृत: शाम 4:31 से 5:57 तक
चर: शाम 5:57 से रात्रि 7:31 तक
लाभ: रात्रि 10:38 ले 12:11 तक
विज्ञापन
6 of 8
Diwali 2025 Laxmi Puja Muhurat
- फोटो : adobe
दीपावली 2025- निशिता काल पूजा मुहूर्त
निशिता काल- रात्रि 11:41 से 12:31 तक
सिंह लग्न काल- सुबह 01:38 से 03:56 तक
दीपावली 2025- लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (दिनभर 20 अक्तूबर)
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 से 12:34 तक
विजयी मुहूर्त: दोपहर 02:07 से 02:53 तक
गोधूली मुहूर्त: शाम 05:57 से 06:22 तक
संध्या पूजा: शाम 05:57 से 07:12 तक
विज्ञापन
7 of 8
Diwali 2025 Laxmi Puja Muhurat
- फोटो : adobe
दुकान-ऑफिस, गृहस्थों और व्यापारियों के लिए लक्ष्मी पूजन मुहूर्त
ऑफिस के लिए (लाभ)- दोपहर 3:30 मिनट से शाम 5:00 बजे तक
छात्रों के लिए (अमृत)- शाम 5:00 मिनट से लेकर 6:30 मिनट तक
प्रदोष काल- 05:46 से 08:18 तक
वृषभ काल- 07:08 से 09 :03 तक
गृहस्थ, किसान, व्यापारी और विद्यार्थी के लिए- शाम 7: 32 मिनट से लेकर रात 9: 28 मिनट तक
नए व्यापारियों के लिए (चंचल)- शाम 5:55 मिनट से लेकर 7:25 मिनट तक।
परंपरागत व्यापारियों के लिए (शुभ)- रात 3:25 मिनट से लेकर 4:55 मिनट तक।
दिवाली लक्ष्मी-गणेश पूजन विधि
दिवाली पर प्रदोष वेला से लेकर पिशाच वेला के आरंभ से पहले तक ही महालक्ष्मी पूजा का विधान है। यह पिशाच वेला रात्रि 02 बजे से आरंभ होती है। दीपावली के दिन प्रदोष वेला, स्थानीय सूर्यास्त से 72 मिनट पहले और 72 मिनट बाद तक की वेला प्रदोष वेला मानी गयी है।
इस दिन स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्राभूषण धारण करके घर के पूजास्थल पर यथाशक्ति पूजन सामग्री लेकर बैठें ,साथ ही गणेश सहित महालक्ष्मी वरुण, कुबेर, श्रीयंत्र, कुबेरयंत्र और नवग्रह यंत्र लें, ध्यान रहे दीपावली पूजन में लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्तियां अथवा चित्र बिल्कुल नया होना चाहिए यानि पहले उन मूर्तियों का प्रयोग पूजा में न किया गया हो। आप इस बात का ध्यान रखें कि पूजा में श्रद्धा का नैवेद्य ही चढ़ाएं, भाव और भक्ति की कमी न रहने पाए तभी लक्ष्मीजी आप से प्रसन्न होंगी। पूजा में कमल पुष्प और आंवले का प्रयोग भी हो जाए तो और उत्तम रहेगा।
इसके अतिरिक्त गुडहल, लाल कनेर,गेंदा आदि से भी भी मां की आराधना कर सकते है। साथ ही श्रृंगार का सामान हल्दी, रोली,मोली,लाल चन्दन, अक्षत,लौंग ,इलायची, पान,सुपारी, शहद, फल, मिष्ठान,गंगाजल, नारियल,कलश अथवा जो भी यथा समय उपलब्द्ध हो उसे साथ लेकर बैठें । अपने ऊपर जल छिड़कते हुए भगवान् ॐ पुण्डरीकाक्ष का स्मरण करके अपने ऊपर जल छिड़कें। सभी सामग्रियों पर भी गंगाजल छिडकें अब पृथ्वी स्पर्श करते हुए ॐ भूम्यै नमः कहें ।
पूजा स्थल के दक्षिण-पूर्व के तरफ घी का दीप जलाते हुए ॐ दीपोज्योतिः परब्रह्म दीपोज्योतिः जनार्दनः ! दीपो हरतु में पापं पूजा दीपं नमोस्तुते ! जो मंगल मंत्र आता हो उसे पढ़ें और स्वयं संकल्प करें । ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ! इस मंत्र को पढ़ते हुए सभी पूजन सामग्री अर्पण कर सकते हैं।
देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश के लिए भोग में खीर, बूंदी के लड्डू,सूखे मेवे या फिर मावे से बनी हुई मिठाई रखें एवं आरती करें। पूजन के पश्च्यात चारमुखी दीपक रात्रि भर जलाएं। विद्यार्थी वर्ग इस दिन माता महासरस्वती का मंत्र "या देवि ! सर्व भूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता ! नमस्तस्यै ! नमस्तस्यै ! नमस्तस्यै नमोनमः !! का जप करके शिक्षा प्रतियोगिता में बड़ी सफलता अर्जित कर सकते हैं ।