फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Diwali 2020: दिवाली आज, जानें लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त, प्रदोष काल, वृषभ काल और चौघड़िया

Sat, 14 Nov 2020 07:52 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
दिवाली 2020 की शुभकामनाएं - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन
Diwali 2020 Shubh Muhurat Timing: दीपावली हर वर्ष कार्तिक माह कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर मनाई जाती है। इस वर्ष दिवाली शनिवार, 14 नवंबर को है। दिवाली पर देवी लक्ष्मी और गणेश महाराज की विधिवत रूप से पूजा करने का विधान है। आप भी अपने घर पर मां लक्ष्मी-गणेश की शुभ मुहूर्त में पूजा अर्चना कर धन और वैभव की देवी आशीर्वाद पा सकते हैं। आइए जानते हैं लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि। 
विज्ञापन


दिवाली 2020 लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त्त, 14 नवंबर :  शाम 5 बजकर 30 मिनट से 7 बजकर 25 मिनट तक 
अवधि : 1 घंटे 55 मिनट
प्रदोष काल : शाम 5 बजकर 27 मिनट से 8 बजकर 06 मिनट तक
वृषभ काल :  14 नवंबर शाम 5 बजकर 30 मिनट से 7 बजकर 25 मिनट तक

लक्ष्मी पूजन 2020: चौघड़िया मुहूर्त
दोपहर का समय: 2 बजकर 18 से शाम 4 बजकर 7 मिनट तक
शाम: शाम को 5 बजकर 30 मिनट से शाम 7 बजकर 8 मिनट तक
रात्रि: रात 8 बजक 50 मिनट से देर रात 1 बजकर 45 मिनट तक

दिवाली महानिशीथ काल मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त्त 23:39 मिनट से 24:32 मिनट तक



दिवाली पूजा विधि
  • सबसे पहले एक चौकी पर सफेद वस्त्र बिछाकर उस पर मां लक्ष्मी, सरस्वती व गणेश जी का चित्र या प्रतिमा को विराजमान करें। 
  • पूजा के जलपात्र से थोड़ा-सा जल लेकर उसे प्रतिमा के ऊपर नीच दिए गए मंत्र को पढ़ते हुए छिड़कें। 
  • अपने और फिर पूजा के आसन को भी इसी तरह जल छिड़ककर पवित्र कर लें।

मंत्र
ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा। 
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि:।।

  • अब पृथ्वी माता को प्रणाम करें और नीचे दिए गए मंत्र को बोलें और उनसे क्षमा प्रार्थना करते हुए आसन पर बैठें

मंत्र

विज्ञापन

पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग ऋषिः सुतलं छन्दः कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥
ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता। 
त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्॥ 
पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः॥ 

  • अब ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः मंत्र को बोलते हुए गंगाजल का आचमन करें। 
  • ध्यान व संकल्प विधि
  • इस पूरी प्रक्रिया के बाद मन को शांत कर आंखें बंद करें
  • मां को मन ही मन प्रणाम करें। 
  • इसके बाद हाथ में जल लेकर पूजा का संकल्प करें। 
  • संकल्प के लिए हाथ में अक्षत (चावल), पुष्प और जल लें। 
  • साथ में एक रूपए (या यथासंभव धन) का सिक्का भी ले लें। 
  • इन सब को हाथ में लेकर संकल्प करें कि मैं अमुक व्यक्ति अमुक स्थान व समय पर मां लक्ष्मी, सरस्वती तथा गणेशजी की पूजा करने जा रहा हूं, जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हों।
  • इसके बाद सबसे पहले भगवान गणेशजी व गौरी का पूजन करें। 
  • फिर कलश पूजन करें। 
  • फिर नवग्रहों का पूजन करें। 
  • हाथ में अक्षत और पुष्प लें।
  • नवग्रह स्तोत्र बोलें। 
  • इसके बाद भगवती षोडश मातृकाओं का पूजन करें। 
  • इन सभी के पूजन के बाद मातृकाओं को गंध, अक्षत व पुष्प प्रदान करते हुए पूजन करें। 
  • मौली को गणपति, माता लक्ष्मी व सरस्वती को अर्पण कर अपने हाथ पर बंधवा लें। 
  • अब सभी देवी-देवताओं के तिलक लगाकर स्वयं को तिलक लगवाएं। 
  • इसके बाद मां महालक्ष्मी की पूजा आरंभ करें।
  • श्रीसूक्त, लक्ष्मीसूक्त व कनकधारा स्रोत का पाठ करें।
  • सबसे पहले भगवान गणेशजी, लक्ष्मीजी का पूजन करें। 
  • उनकी प्रतिमा के आगे 7, 11 अथवा 21 दीपक जलाएं।
  • मां को श्रृंगार सामग्री अर्पण करें। 
  • मां को भोग लगा कर उनकी आरती करें।
  • अंत में मां से जाने-अनजाने हुए सभी भूलों के लिए क्षमा-प्रार्थना मांगें। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें