धूमावती जयंती पर्व 18 जून, शुक्रवार को मनाया जाएगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार, यह पर्व प्रति वर्ष ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। भगवान शिव द्वारा प्रकट की गई दस महाविद्याओं में सातवें स्थान पर पुरुषशून्या 'विधवा' आदि नामों से जानी जाने वाली माँ 'धूमावती' का नाम आता है। विधवा, भिक्षाटन, दरिद्रता, भूकंप, सूखा, बाढ़, प्यास रुदन, वैधव्य, पुत्रसंताप, कलह इनकी साक्षात प्रतिमाएं हैं, डरावनी सूरत, रुक्षता, अपंग शरीर जिनके दंड का फल है इन सबों की मूल प्रकृति में 'धूमावती' ही हैं। इनका निवास ज्येष्ठा 'नक्षत्र' है। इसीलिए इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक जीवन पर्यन्त किसी ना किसी प्रकार के संघर्षों से लड़ता रहता है। इन्हें ही अलक्ष्मी नाम से भी जाना जाता है। इनकी पूजा-आराधना से उपरोक्त सभी प्राणियों के समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं। मान्यता है कि इस कुछ विशेष उपाय करने से जातकों को कई प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। कर्ज मुक्ति और कालसर्प दोष मुक्ति के लिए आपको ये उपाय जरूर करने चाहिए।