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Shri Kuber Aarti On Dhanteras: धनतेरस पर त्रिपुष्कर योग का संयोग, कुबेर जी की आरती से भर जाएंगे धन के भंडार

Tue, 29 Oct 2024 07:11 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

धनतेरस के दिन भी माता लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है, इसलिए धनतेरस की रात को माता लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की भी पुरी विधि विधान से पूजा की जाती है।
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जीवन में धन धान्य चाहते हैं, तो रोजाना कुबेर देव की आरती करें। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Shri Kuber Aarti Lyrics: धनतेरस पर  माता लक्ष्मी के साथ-साथ कुबेर महाराज की भी पूजा अर्चना की जाती है। एक ओर जहां माता लक्ष्मी धन की देवी मानी जाती हैं वहीं दूसरी ओर कुबेर महाराज सभी देवताओं के कोषाध्यक्ष के रूप में जाने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी लक्ष्मी ने धन संबंधी समस्त कार्यों का लेखा-जोखा कुबेर भगवान को सौंप रखा है। धन, सुख और समृद्धि के लिए लोग देवी लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की भी पूजा करते हैं। धनतेरस के दिन भी माता लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है, इसलिए धनतेरस की रात को माता लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की भी पुरी विधि विधान से पूजा की जाती है। यदि आप भी जीवन में धन धान्य चाहते हैं, तो रोजाना कुबेर देव के मंत्र का 108 बार जाप करने के बाद श्री कुबरे जी की आरती जरूर करें। ऐसा करने से आपके जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होगी। यहाँ पढ़ें कुबेर जी की सम्पूर्ण आरती। धनतेरस की पूजा के बाद इस आरती को पढ़ने से आपके जीवन से धन की समस्या दूर हो सकती है। 

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कुबेर देव की आरती 

ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे, स्वामी जय यक्ष जय यक्ष कुबेर हरे । 
शरण पड़े भगतों के, भण्डार कुबेर भरे । ॥ 
ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे...॥

शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े, स्वामी भक्त कुबेर बड़े । 
दैत्य दानव मानव से, कई-कई युद्ध लड़े ॥ ॥ 
ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे...॥

स्वर्ण सिंहासन बैठे, सिर पर छत्र फिरे, स्वामी सिर पर छत्र फिरे । 
योगिनी मंगल गावैं, सब जय जय कार करैं ॥ ॥ 
ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे...॥

गदा त्रिशूल हाथ में, शस्त्र बहुत धरे, स्वामी शस्त्र बहुत धरे । 
दुख भय संकट मोचन, धनुष टंकार करें ॥ ॥ 
ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे...॥

भांति भांति के व्यंजन बहुत बने, स्वामी व्यंजन बहुत बने । 
मोहन भोग लगावैं, साथ में उड़द चने ॥ ॥ 
ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे...॥

बल बुद्धि विद्या दाता, हम तेरी शरण पड़े, स्वामी हम तेरी शरण पड़े । 
अपने भक्त जनों के, सारे काम संवारे ॥ ॥ 
ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे...॥

मुकुट मणी की शोभा, मोतियन हार गले, स्वामी मोतियन हार गले । 
अगर कपूर की बाती, घी की जोत जले ॥ ॥ '
ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे...॥

यक्ष कुबेर जी की आरती, जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे । 
कहत प्रेमपाल स्वामी, मनवांछित फल पावे ॥ ॥ 
ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे...॥


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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